(सिटी रिपोर्टर)
भोपाल। राजधानी में आयोजित भोपाल उत्सव मेला जहां एक ओर मनोरंजन और पारिवारिक उत्सव का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर यहां खुलेआम ऐसे खेल चलाए जा रहे हैं जो खेल कम, जुआ ज्यादा नज़र आते हैं। मेले में लगाया गया 6 बॉल नंबर गेम इसका ताज़ा उदाहरण है, जहां नियमों की आड़ में लोगों से 50-50 रुपये की खुली वसूली की जा रही है।
क्या है पूरा खेल?
इस खेल में ग्राहक को 6 बॉल दी जाती हैं, जिन्हें ऊपर बने बॉक्स में डालना होता है। बॉक्स में पहले से अंक लिखे होते हैं। बॉल डालने के बाद जिन नंबरों पर बॉल गिरती है, उनका काउंट कर नीचे लगे चार्ट से मिलान किया जाता है।
यदि “किस्मत” ने साथ दिया तो कोई खिलौना इनाम में मिलता है 0 वरना 50 रुपये सीधे आयोजकों की जेब में।
खेल नहीं, नंबरो का जाल
पहली नज़र में यह खेल बच्चों और आम लोगों के लिए मनोरंजक लगता है, लेकिन हकीकत में बॉक्स के स्लॉट इस तरह डिजाइन हैं कि कुछ नंबरों पर बॉल गिरने की संभावना बेहद कम है, चार्ट इस तरह बनाया गया है कि इनाम निकलने की संभावना मात्र 5 प्रतिशत रहती है. समझने के लिए मान लीजिये जैसे चार्ट पर नंबर अंकित है 36, इस नंबर तक पहुंचने के लिए 6 की 6 बॉल 6 नंबर के बॉक्स में डालना होगा, जो की लगभग असंभव है।
खिलाड़ी को पहले नियम नहीं समझाए जाते
हर बार हार तय, जीत महज़ भ्रम
यानी यह खेल स्किल पर नहीं बल्कि भ्रम और किस्मत के झूठे भरोसे पर टिका है।
50 रुपये में ‘मनोरंजन’, लेकिन रोज़ाना हजारों की कमाई
एक व्यक्ति यदि दिनभर में 200–300 बार भी यह खेल खेलवाता है, तो अनुमान लगाया जा सकता है कि एक ही स्टॉल से रोज़ाना 10–15 हजार रुपये तक की अवैध कमाई हो रही है । वो भी बिना किसी वैध अनुमति या पारदर्शिता के।
मेला प्रबंधन की चुप्पी या मौन अनुमति
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मेला प्रबंधन को इन खेलों की जानकारी नहीं?
क्या जिला प्रशासन ने ऐसे खेलों की जांच और अनुमति दी है?
क्या यह जुआ अधिनियम के दायरे में नहीं आता?
अगर नहीं आता, तो फिर बच्चों और आम जनता को गुमराह कर पैसे ऐंठने की खुली छूट क्यों?
लालच के खेल में बच्चों को बनाया जा रहा शिकार
इस खेल का सबसे बड़ा निशाना बच्चे और गरीब वर्ग हैं, जो खिलौने के लालच में बार-बार पैसे गंवाते हैं। यह न सिर्फ आर्थिक शोषण है, बल्कि जुए की मानसिकता को भी बढ़ावा देता है।
सख्त नियमों और प्रशासन के आदेशों की दरकार
-ऐसे सभी खेलों की तत्काल जांच
-अवैध और भ्रामक खेलों पर प्रतिबंधमे
- मेला प्रबंधन और ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो
- प्रशासन द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों
भोपाल उत्सव मेला अगर उत्सव है, तो लूट का अड्डा क्यों?
अब देखना यह है कि प्रशासन आंखें खोलता है या फिर यह ‘खेल’ यूं ही जनता की जेब खाली करता रहेगा।

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