जहांगीराबाद में वकील-पुलिस विवाद ने लिया नया मोड़, टीआई समेत 3 पुलिसकर्मियों पर FIR, अधिवक्ता पर भी केस दर्ज

 



निलंबन के बाद टीआई राजन सिंह अहिरवार का वीडियो वायरल


(शहर संवाददाता)

भोपाल। जहांगीराबाद थाने में अधिवक्ता राकेश रावल और पुलिसकर्मियों के बीच हुआ विवाद अब थाने की कार्रवाई से निकलकर क्रॉस एफआईआर और सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। एक तरफ अधिवक्ता की शिकायत पर तत्कालीन टीआई राजन सिंह अहिरवार, आरक्षक यश लखेरा और रामस्वरूप के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ पुलिसकर्मी हरिओम वर्मा की शिकायत पर अधिवक्ता राकेश रावल के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।


पहले विवाद, फिर थाने में मारपीट के आरोप

मामला 22 सितंबर की रात का बताया जा रहा है। गणेश विसर्जन के दौरान रास्ते को लेकर अधिवक्ता राकेश रावल और पुलिस के बीच विवाद हुआ। इसके बाद रावल को जहांगीराबाद थाने ले जाया गया। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि थाने में उनके साथ मारपीट की गई।


घटना के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों में अधिवक्ता के कपड़ों पर कीचड़ तथा शरीर पर चोट के निशान दिखाई देने की तस्वीरे सामने आई है। मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन टीआई राजन सिंह अहिरवार समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।


टीआई समेत तीन पर FIR

अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर टीआई राजन सिंह अहिरवार, आरक्षक यश लखेरा और आरक्षक रामस्वरूप के खिलाफ BNS की धारा 115(2), 296(b) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।


तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया है। मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।


पुलिस ने भी दर्ज कराया अधिवक्ता के खिलाफ प्रकरण

मामले में कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। पुलिसकर्मी हरिओम वर्मा की शिकायत पर अधिवक्ता राकेश रावल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की शिकायत में अधिवक्ता पर शासकीय कार्य में बाधा, अभद्रता और मारपीट जैसे आरोप लगाए गए हैं।


इस तरह अब दोनों पक्षों की शिकायतें पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं और जांच में यह स्पष्ट होना है कि विवाद के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किसकी भूमिका क्या थी।


निलंबित टीआई का वीडियो आया सामने

एफआईआर और निलंबन के बाद टीआई राजन सिंह अहिरवार का सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में अहिरवार ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखा है।


उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी होने के कारण वह सार्वजनिक रूप से मामले से जुड़ी हर बात नहीं बता सकते। उनका दावा है कि उनके पास घटना से जुड़े तथ्य और साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें उचित समय पर सामने रखा जाएगा।


टीआई ने वीडियो में एक महिला पुलिस अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों तक मामले की सही जानकारी नहीं पहुंची। उन्होंने संबंधित अधिकारी को जांच से दूर रखने की मांग भी की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

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