(अपराध संवाददाता)
भोपाल के थाना तलैया क्षेत्र में काली मंदिर के पास मिले मृत पशु के अवशेषों ने शहर का माहौल गरमा दिया था। गाय के बछड़े की अफवाह ने देखते ही देखते मामला सांप्रदायिक रंग ले लिया, धरना-प्रदर्शन शुरू हो गए और पुलिस पर दबाव बनाया जाने लगा। लेकिन महज 5 दिन में पुलिस जांच ने पूरी कहानी पलट दी।
क्या था पूरा मामला..
- अवशेष मिलने के बाद “गाय के बछड़े” की अफवाह से भड़का माहौल
- धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी से मामला हुआ तनावपूर्ण
- पुलिस जांच में खुलासा, भैंस के बछड़े का था शव, प्राकृतिक मौत
- 65 वर्षीय फुलसिंह चौधरी ने अवशेष फेंकने की बात कबूली
- 400+ CCTV फुटेज खंगाले, 150 लोगों से पूछताछ
- घटना में इस्तेमाल छुरी, रस्सी और बाइक जब्त
अफवाहों ने बढ़ाया तनाव, सवालों के घेरे में जल्दबाज़ी
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बिना पुष्टि के आखिर इतनी जल्दबाज़ी में माहौल क्यों गर्माया गया? क्या यह सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी का दबाव था या त्योहारों के बीच माहौल बिगाड़ने की सोची-समझी कोशिश?
पुराना ‘फॉर्मूला’ फिर एक्टिव?
यह मामला उस पुराने पैटर्न की ओर इशारा करता है, जिसमें छोटी घटनाओं को तूल देकर दो समुदायों के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश की जाती है। इससे पहले गौतम नगर क्षेत्र में पथराव की घटना को भी सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश हुई थी, जो जांच में आपसी रंजिश निकली।
निशाने पर एक समुदाय, फिर निकली हवा
इस मामले में भी शुरुआती दौर में एक समुदाय विशेष को घेरने की कोशिश हुई, लेकिन पुलिस जांच ने उन दावों की हवा निकाल दी।
पुलिस की सक्रियता से बिगड़ते हालात संभले
हालांकि, समय रहते पुलिस की सक्रियता ने पूरे मामले का खुलासा कर संभावित बड़े विवाद को टाल दिया। राजधानी पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया कि अफवाहों के सहारे माहौल बिगाड़ने वालों पर अब सख्त नजर रखी जा रही है।

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