मुख्तार मलिक हत्याकांड में 11 दोषियों को उम्रकैद


 झालावाड़ कोर्ट का बड़ा फैसला, 2 आरोपी बरी, एक को 5 साल की सजा

(विशेष संवाददाता)

भोपाल/झालावाड़राजस्थान के झालावाड़ की अदालत ने भोपाल के कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार मलिक हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं साक्ष्यों के अभाव में दो आरोपियों को बरी कर दिया गया, जबकि एक आरोपी को पांच वर्ष के कारावास की सजा दी गई है।

यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनाया। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना।

नाव से पहुंचे थे भीमसागर बांध, घात लगाकर किया हमला

यह सनसनीखेज वारदात 31 मई 2022 की रात भीमसागर बांध क्षेत्र में हुई थी। मुख्तार मलिक अपने साथी कमल किशोर और अन्य लोगों के साथ नाव से वहां पहुंचा था। इसी दौरान अब्दुल बंटी, वसीम अहमद राजा और उनके साथियों ने घात लगाकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।

हमले में कमल किशोर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। कुछ लोग जान बचाने के लिए पानी में कूद गए। गोली लगने के बाद मुख्तार मलिक जंगल की ओर भागा, लेकिन गंभीर चोटों और पानी की कमी के कारण उसकी मौत हो गई। अगले दिन पुलिस ने उसका शव जंगल में करीब एक किलोमीटर अंदर बरामद किया था।

44 गवाह और 94 दस्तावेज बने फैसले का आधार

मामले की जांच तत्कालीन अकलेरा डीएसपी गिरधारी सिंह ने की थी। अदालत में अभियोजन पक्ष ने 44 गवाहों के बयान और 94 दस्तावेज पेश किए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 11 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

कौन था मुख्तार मलिक

मुख्तार मलिक मूल रूप से ओबेदुल्लागंज का रहने वाला था, लेकिन उसने भोपाल सहित मध्यप्रदेश में अपराध जगत में अपनी अलग पहचान बना ली थी। हत्या के समय उसके खिलाफ 58 आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, रंगदारी, धमकी और हमले जैसे गंभीर अपराध शामिल थे।

मुख्तार मलिक का आपराधिक इतिहास

वर्ष 1982 में पहली बार गिरफ्तार हुआ था।

1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को धमकी देने का आरोप लगा।

1996 में रायसेन जिले में फिरौती के लिए तीन बच्चों के अपहरण का मामला दर्ज हुआ।

2003 में भोपाल सेंट्रल जेल के डिप्टी जेलर पी.डी. श्रीवास्तव पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगा।

2006-07 में भोपाल जिला अदालत के चर्चित मुन्ने पेंटर गैंगवार मामले में हाईकोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट से बरी हो गया।

2012 में मुख्तार गैंग पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी।

बेटे यासीन मलिक की भी चर्चा

मुख्तार मलिक की मौत के बाद उसका बेटा यासीन मलिक भी अपराध जगत में सक्रिय बताया जाता है। पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम भी कई मामलों में सामने आता रहा है।

फैसले से अपराध जगत में हलचल

झालावाड़ कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश और राजस्थान के अपराध जगत में हलचल मच गई है। लंबे समय से चर्चित इस मामले में आए फैसले को कानून व्यवस्था की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

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