(शेख फ़िरोज़)
भोपाल। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़, विदिशा, अशोकनगर और दमोह जिलों में एक तथाकथित निवेश कंपनी द्वारा बड़े स्तर पर आर्थिक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कंपनी ने आम नागरिकों को धनराशि दोगुनी और तीन गुना करने का लालच देकर निवेश कराया, लेकिन अवधि पूरी होने के बाद निवेशकों को उनकी रकम वापस नहीं मिली। इस घोटाले से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने सभी प्रकरणों की पूरक जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंपने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जबलपुर और भोपाल की संयुक्त टीम गठित की गई है, जो पुलिस महानिरीक्षक, CID के पर्यवेक्षण में पूरे मामले की गहन जांच करेगी।
अब तक चारों जिलों में कुल 11 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। प्रारंभिक जांच में करीब 820 पीड़ितों से 42 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी सामने आई है। अधिकारियों का मानना है कि पीड़ितों की संख्या और धोखाधड़ी की राशि में अभी और बढ़ोतरी हो सकती है।
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह मामला एक संगठित पोंजी स्कीम से जुड़ा हुआ है, जिसमें सुनियोजित तरीके से लोगों को झांसे में लेकर निवेश कराया गया। पुलिस अब मुख्य आरोपियों की पहचान कर उनकी संपत्तियों की जब्ती और रकम की रिकवरी पर फोकस कर रही है।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी निवेश योजना में पैसे लगाने से पहले उसकी वैधता और विश्वसनीयता की पूरी जांच करें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की सलाह दी गई है।

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