(मो.आरिफ खान)
भोपाल। राजधानी के आनंद नगर स्थित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की जिस उचित मूल्य कि दुकान पर जांच के दौरान 12.66 क्विंटल गेहूं कम पाया गया था और जहां गंभीर स्टॉक विसंगति के बावजूद महज ₹5000 का जुर्माना लगाकर मामला बंद कर दिया गया था, उसी दुकान की मौजूदा स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
दुकान पर चावल और गेहूं का स्टॉक खत्म होने का नोटिस चस्पा है, जबकि दुकान के सामने बड़ी मात्रा में नमक के पैकेट खुले में रखे हुए दिखाई दे रहे हैं। ऐसे समय में जब मानसून सक्रिय है और मौसम विभाग लगातार बारिश की चेतावनियां जारी कर रहा है, खाद्य सामग्री को खुले में रखना खुद विभागीय निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
पहले स्टॉक में गड़बड़ी, अब भंडारण पर सवाल
दुकान कोड 2803122 की 26 जून 2025 को हुई जांच में रिकॉर्ड के मुकाबले 12.66 क्विंटल गेहूं कम और 4.61 क्विंटल चावल अधिक पाया गया था। यह कोई मामूली अंतर नहीं था। इसके बावजूद तत्काल निलंबन, एफआईआर या कठोर कार्रवाई नहीं हुई।
करीब 20 दिन बाद कारण बताओ नोटिस जारी हुआ और लगभग सात माह बाद सिर्फ ₹5000 का आर्थिक दंड लगाकर मामला समाप्त कर दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि आदेश में स्वयं यह उल्लेख किया गया कि दुकान संचालक का जवाब "पूर्णतः संतोषजनक नहीं पाया गया"। इसके बावजूद लाइसेंस सुरक्षित रहा और दुकान का संचालन जारी है।
बारिश में खुले में रखा नमक, जिम्मेदार कौन?
ताजा तस्वीरों में बड़ी मात्रा में नमक खुले में रखा दिखाई दे रहा है। बारिश के मौसम में खाद्य सामग्री को इस तरह खुले में रखना कई सवाल खड़े करता है। यदि बारिश या नमी से सामग्री प्रभावित होती है तो नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण के नियमों का पालन किया जा रहा है? क्या संबंधित अधिकारियों ने हाल के महीनों में दुकान का निरीक्षण किया है?
हालांकि केवल तस्वीर के आधार पर किसी नई अनियमितता की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन जिस दुकान का रिकॉर्ड पहले से विवादों में रहा हो, वहां इस तरह की लापरवाही स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करती है।

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