तीन साल में करीब एक टन एमडी जब्त: भोपाल के 1814 करोड़ के खुलासे के बाद मंदसौर में फिर पकड़ी गई ड्रग फैक्ट्री

 


(फिरदोस अंसारी)


भोपाल। सिंथेटिक ड्रग्स के काले कारोबार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच मंदसौर पुलिस ने एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग निर्माण फैक्ट्री का खुलासा कर बड़ी सफलता हासिल की है।
गौरतलब  है कि मध्य प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान उजागर हुई प्रमुख फैक्ट्रियों से करीब 952 किलोग्राम एमडी ड्रग जब्त की जा चुकी है। इनमें सबसे बड़ा खुलासा वर्ष 2024 में भोपाल में हुआ था, जहां लगभग 1814 करोड़ रुपये मूल्य की 907 किलोग्राम एमडी ड्रग बरामद की गई थी। ताजा कार्रवाई में मंदसौर से 13.85 किलोग्राम एमडी ड्रग और ड्रग निर्माण में प्रयुक्त रसायन जब्त किए गए हैं। नशे के इस अवैध और खतरनाक कारोबार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे यह संकेत अवश्य मिलता है कि प्रदेश सिंथेटिक ड्रग माफिया के निशाने पर  है। हालांकि, जांच एजेंसियों की सख्त कार्रवाई से इन नेटवर्कों पर लगातार प्रहार हो रहा है।


13 किलो से अधिक एमडी ड्रग ज़प्त

मंदसौर पुलिस ने बुधवार को ग्राम बाजखेड़ी स्थित एक खेत पर बने मकान में संचालित अवैध एमडी ड्रग फैक्ट्री का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान 13 किलो 850 ग्राम एमडी ड्रग, 9 किलो 109 ग्राम रासायनिक पदार्थ तथा ड्रग निर्माण में उपयोग होने वाले उपकरण जब्त किए गए। पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में ड्रग निर्माण और तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं।


युवाओं में तेज़ी से जकड रहा "म्याऊं" नशा

एमडी, जिसे नशे की दुनिया में "म्याऊं" के नाम से भी जाना जाता है, पिछले कुछ वर्षों में युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इसकी लत कई युवाओं को चोरी, लूट और अन्य संपत्ति संबंधी अपराधों की ओर धकेल रही है। वहीं, कुछ उपभोक्ता बाद में पेडलर बनकर ड्रग तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसे में यह कारोबार कानून-व्यवस्था और समाज दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।


भोपाल से मालवा तक फैला नेटवर्क

अक्टूबर 2024 में राजधानी भोपाल के बगरोदा औद्योगिक क्षेत्र में गुजरात एटीएस और एनसीबी की संयुक्त कार्रवाई में देश की सबसे बड़ी एमडी ड्रग फैक्ट्रियों में से एक का पर्दाफाश हुआ था। वहां से 907 किलोग्राम एमडी ड्रग और लगभग 5000 किलोग्राम रासायनिक पदार्थ जब्त किए गए थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 1814 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस कार्रवाई ने पहली बार संकेत दिया कि मध्य प्रदेश केवल तस्करी का मार्ग नहीं, बल्कि सिंथेटिक ड्रग उत्पादन का भी केंद्र बनता जा रहा है।
भोपाल में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान मालवा क्षेत्र की ओर गया। वर्ष 2025 के दौरान मंदसौर, नीमच, रतलाम और आगर-मालवा जिलों में ड्रग नेटवर्क से जुड़े कई सुराग मिले। रसायनों की आपूर्ति, वित्तीय लेन-देन और अंतरराज्यीय संपर्कों की जांच शुरू की गई।


नर्सरी की आड़ में पनप रहा था नशे का धंदा

जनवरी 2026 में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने आगर-मालवा जिले में नर्सरी की आड़ में संचालित एमडी ड्रग निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया। यहां से 31.25 किलोग्राम एमडी ड्रग, बड़ी मात्रा में रसायन और उत्पादन उपकरण बरामद किए गए। जांच में मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र तक फैले नेटवर्क के संकेत मिले थे।
इसी वर्ष रतलाम क्षेत्र में भी एमडी ड्रग निर्माण और भंडारण से जुड़े मामलों का खुलासा हुआ। जांच के दौरान राजस्थान तक फैले अंतरराज्यीय सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क की जानकारी सामने आई, जिससे मालवा क्षेत्र में सक्रिय गिरोहों की व्यापक पहुंच उजागर हुई।


मंदसौर में फिर मिला सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क का सुराग

अब मंदसौर में हुई कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग माफिया लगातार नए ठिकानों से अपना नेटवर्क संचालित करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीणा के निर्देशन में थाना नई आबादी पुलिस ने ग्राम बाजखेड़ी में दबिश देकर फैक्ट्री का खुलासा किया। पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस अन्य आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है।

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