फराज और नईम प्रकरण में ATS की जांच तेज, भोपाल से देवबंद तक कथित नेटवर्क की पड़ताल

 


( विशेष संवाददाता )

भोपाल। राजधानी के काजी कैंप इलाके से मोहम्मद फराज उर्फ "खालिद सैफुल्लाह" की गिरफ्तारी के बाद एक कथित कट्टरपंथी नेटवर्क की जांच राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। ATS का दावा है कि फराज पिछले 5 से 6 वर्षों से उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था और दोनों कथित रूप से पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के संपर्क वाले नेटवर्क से जुड़े थे।

विशेष इनपुट मिलने के बाद हुई कार्रवाई

जांच एजेंसियों के अनुसार फराज के संबंध में विशेष इनपुट मिलने के बाद कार्रवाई की गई। ATS का दावा है कि वह पाकिस्तान से संचालित कुछ व्हाट्सएप और टेलीग्राम समूहों से जुड़ा था तथा अन्य युवाओं को भी कथित रूप से इन समूहों से जोड़ने का प्रयास कर रहा था।

अब तक कौन-कौन कार्रवाई के दायरे में आया?

जांच में अब तक दो प्रमुख नाम सामने आए हैं। पहला नाम मोहम्मद फराज का है, जिसे भोपाल के काजी कैंप इलाके से गिरफ्तार किया गया। ATS के अनुसार उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

दूसरा नाम नईम अब्दुल्ला का है, जिसे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के नानौता क्षेत्र से संयुक्त कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई में मध्य प्रदेश ATS, उत्तर प्रदेश ATS, STF और अन्य एजेंसियां शामिल रहीं। ATS का कहना है कि अन्य संदिग्धों की पहचान और तलाश जारी है तथा डिजिटल नेटवर्क की जांच के बाद और नाम सामने आ सकते हैं।

कैसे जुड़े फराज और नईम?

ATS के अनुसार पूछताछ में फराज ने बताया कि उसकी पहचान लगभग 5-6 वर्ष पहले नईम अब्दुल्ला से हुई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि नईम ने ही फराज का परिचय कथित पाकिस्तानी हैंडलरों से कराया था। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ता गया और वे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से संवाद करते रहे।

जांच में क्या-क्या दावे सामने आए?

ATS के अनुसार फराज कई व्हाट्सएप और टेलीग्राम समूहों से जुड़ा था, जिनमें भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों के लोग शामिल थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन समूहों के माध्यम से वैचारिक सामग्री, प्रशिक्षण संबंधी वीडियो और अन्य साहित्य साझा किया जाता था।

जांच एजेंसियों का यह भी दावा है कि समूहों से जुड़े लोगों को नए युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें वैचारिक रूप से प्रभावित करने के लिए प्रेरित किया जाता था। इन दावों की जांच अभी जारी है।

युवाओं को जोड़ने के कथित प्रयास

ATS का आरोप है कि फराज को मध्य प्रदेश में नए लोगों तक पहुंच बनाने और नेटवर्क का विस्तार करने के लिए कहा गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार उसे अन्य युवाओं से संपर्क स्थापित करने और उन्हें समूहों से जोड़ने के लिए भी प्रेरित किया गया था।

जांच में यह दावा भी सामने आया है कि समूह के कुछ सदस्यों को पासपोर्ट बनवाने, विदेश यात्रा के लिए तैयार रहने तथा निर्देश मिलने पर आगे की गतिविधियों में शामिल होने के लिए कहा जाता था। ATS के अनुसार जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि फराज ने पासपोर्ट बनवा रखा था।

बरामद सामग्री और डिजिटल साक्ष्य

ATS और अन्य एजेंसियों ने फराज तथा नईम से जुड़े मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और कुछ दस्तावेज एवं साहित्य जब्त किए हैं। इन उपकरणों और सामग्रियों की फोरेंसिक जांच जारी है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इससे नेटवर्क की संरचना, विदेशी संपर्कों और संभावित अन्य व्यक्तियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।


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