बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी नाम परिवर्तन प्रस्ताव पर राजनीति गरमाई, विरोध के स्वर तेज़




'बरकतुल्लाह भोपाल की विरासत के प्रतीक', नाम बदलने के प्रस्ताव पर बोले मोहम्मद जहीर


(शहर संवाददाता)


भोपाल। बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर "मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय" किए जाने के प्रस्ताव को लेकर विरोध के स्वर लगातार तेज़ होते जा रहे हैं। प्रदेश की राजनीति से लेकर सामाजिक और अल्पसंख्यक संगठनों तक में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। विरोध करने वालों का कहना है कि विश्वविद्यालय का वर्तमान नाम स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतुल्लाह की ऐतिहासिक विरासत और देश की आजादी के संघर्ष से जुड़ा हुआ है, जिसे बदला नहीं जाना चाहिए।

बरकतुल्लाह भोपाल ही नहीं बल्कि पूरे देश के गौरव

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव मोहम्मद जहीर ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि मौलाना बरकतुल्लाह केवल भोपाल ही नहीं बल्कि पूरे देश के गौरव हैं। उन्होंने कहा कि बरकतुल्लाह ने विदेशों में रहकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती प्रदान की थी और उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय की पहचान को बनाए रखा जाना चाहिए।

इस मुद्दे पर कांग्रेस के कई नेताओं ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था, शोध सुविधाओं, शिक्षकों की कमी और विद्यार्थियों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, जबकि नाम परिवर्तन जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है।

मौलाना बरकतुल्लाह राष्ट्रीय विरासत का हिस्सा है

वहीं जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े कुछ पदाधिकारियों, मुस्लिम सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न अल्पसंख्यक मंचों ने भी सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई है। इन संगठनों का कहना है कि मौलाना बरकतुल्लाह स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे नायक थे, जिनकी पहचान किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं बल्कि राष्ट्रीय विरासत का हिस्सा है।

ऐतिहासिक संस्थान की पहचान उसके इतिहास और योगदान से जुड़ी है

भोपाल के कई शिक्षाविदों, इतिहासकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा है कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने जैसे निर्णय से पहले व्यापक जनसुनवाई और अकादमिक समुदाय से चर्चा की जानी चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी ऐतिहासिक संस्थान की पहचान उसके इतिहास और योगदान से जुड़ी होती है।

भोजपाल प्राचीन नाम, मां वाग्देवी ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी

हालांकि प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि "मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय" नाम क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को अधिक व्यापक रूप से प्रस्तुत करेगा। समर्थकों के अनुसार भोजपाल भोपाल का प्राचीन नाम है और मां वाग्देवी ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिए यह नाम शिक्षा संस्थान के अनुरूप है।

कौन थे मौलाना बरकतुल्लाह...

मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने विदेशों में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अभियान चलाया और गदर आंदोलन सहित कई क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े रहे। उनके सम्मान में वर्ष 1988 में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय रखा गया था।


"बरकतुल्लाह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि देश की आजादी की लड़ाई और भोपाल की विरासत का प्रतीक हैं। ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के नाम पर स्थापित संस्थानों की पहचान को संरक्षित रखा जाना चाहिए।"
- मोहम्मद जहीर, सचिव, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी -

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