एक जैसे RTI प्रकरण, लेकिन दो अलग फैसले! बैरागढ़ सर्कल के आदेश पर उठे सवाल

 



(फिरदोस अंसारी)

भोपाल। भोपाल में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत लगभग एक जैसे मामलों में अलग-अलग आदेश सामने आने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी मांगने वाले दो मामलों में अपीलीय अधिकारियों के फैसलों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।


ताजा मामला बैरागढ़ सर्कल का है, जहां आवेदक ने सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति विवरणी और उससे संबंधित जानकारी मांगी थी। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी लोक सूचना अधिकारी ( ने कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद मामला प्रथम अपील में गया।


18 जून 2026 को पारित आदेश में प्रथम अपीलीय अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि लोक सूचना अधिकारी ने जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है लिहाज़ा एक सप्ताह के भीतर आवेदन का निराकरण करने के निर्देश दिए। लेकिन आदेश जारी होने के एक महीने से अधिक समय बाद भी आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।


दूसरे मामले में जानकारी देने के आदेश


वहीं, इसी तरह के एक अन्य मामले में भोपाल कलेक्टर कार्यालय से सरकारी कर्मचारी की संपत्ति संबंधी जानकारी मांगी गई थी। उस प्रकरण में 22 अगस्त 2024 को अपीलीय  अधिकारी ने आदेश क्रमांक 80/अपील/सू.अ./2024 पारित किया था । आदेश में यह लिखा गया था कि संबंधित कर्मचारी का मूल पदस्थापना स्थल अलग है, आवेदन को वहां के लोक सूचना अधिकारी को स्थानांतरित  करने के निर्देश दिए। अर्थात जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, न कि आवेदन को व्यक्तिगत जानकारी बताकर खारिज किया गया।


राज्य सूचना आयोग ने भी दिए सूचना देने के आदेश


इस मामले में  मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने आदेश क्रमांक A-5320/SIC/MORENA/2024 पारित करते हुए संबंधित विभाग को जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे ।


फिर एक जैसे मामलों में अलग-अलग फैसला क्यों?


दोनों मामलों में समान प्रकार की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन निर्णय अलग-अलग हुए।
2024 के मामले में आवेदन को संबंधित विभाग भेजकर जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई गई।
वही 2026 के बैरागढ़ मामले में उसी प्रकार की जानकारी को व्यक्तिगत बताते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया गया। इसी प्रकार के आदेश दो अन्य मामलो में भी दिए गए है.


सुनवाई का नोटिस मिलने पर भी सवाल


प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा  24 जून 2026 को जारी आदेश ने यह उल्लेख किया गया कि "अपीलार्थी को पक्ष समर्थन हेतु पत्र जारी किया गया तथा अपीलार्थी अनुपस्थित रहा।" जबकि आवेदक का दावा है कि उसे सुनवाई के लिए कोई नोटिस या पत्र  प्राप्त ही नहीं हुआ। यदि नोटिस की विधिवत तामील नहीं हुई, तो बिना सुनवाई के आदेश पारित किया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है।



यही कारण है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि जब एक जैसे मामलों में पहले जानकारी देने की प्रक्रिया अपनाई गई, तो अब उसी प्रकार की सूचना को देने से क्यों रोका जा रहा है?


RTI कानून का उद्देश्य पारदर्शिता


सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। ऐसे में समान प्रकृति के मामलों में अलग-अलग निर्णय आने से नागरिकों के मन में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।



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