यतीमखाना वक्फ संपत्ति मामले में शाहिद अलीम को झटका, अग्रिम जमानत खारिज

 



मुस्लिम महासभा की आपत्ति पर अदालत में वक्फ संपत्ति के स्वरूप, प्रबंधन और आय के उपयोग को लेकर रखे गए तर्क


(शहर संवाददाता)

भोपाल। शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र स्थित इदारा यतीमखाना शाहजहानी वाके मुत्तसिल मदरसा जहांगीरिया की वक्फ संपत्ति से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में दारुल शफकत सोसायटी के अध्यक्ष शाहिद अलीम खान को अदालत से राहत नहीं मिल सकी। अठारहवें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, भोपाल की अदालत ने अपराध क्रमांक 534/2026 में आरोपी द्वारा प्रस्तुत अग्रिम जमानत आवेदन क्रमांक BA/2945/2026 को खारिज कर दिया।


अग्रिम जमानत आवेदन का मुस्लिम महासभा, भोपाल की ओर से आपत्ति दाखिल कर विरोध किया गया। महासभा के महासचिव मोहम्मद कलीम की ओर से अधिवक्ता आबिद मोहम्मद खान ने न्यायालय के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत करते हुए मामले में वक्फ संपत्ति के कानूनी स्वरूप और उसके प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा।


‘यह सामान्य निजी संपत्ति नहीं, वक्फ संपत्ति है’

अधिवक्ता आबिद मोहम्मद खान की ओर से न्यायालय में रखी गई आपत्ति का प्रमुख आधार यह रहा कि विवादित संपत्ति को सामान्य निजी संपत्ति के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह वक्फ संपत्ति है, जिसका उपयोग निर्धारित धार्मिक, सामाजिक एवं कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए किया जाना अपेक्षित है।

आपत्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित वक्फ संपत्ति 24 नवंबर 1961 से मध्यप्रदेश राजपत्र में अधिसूचित है। ऐसे में संपत्ति के प्रबंधन, उससे प्राप्त आय तथा उसके उपयोग को लेकर उठे सवालों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।


प्रबंधन और आय के उपयोग पर उठाए सवाल

न्यायालय में हुई बहस के दौरान वक्फ संपत्ति के प्रबंधन तथा उससे प्राप्त होने वाली आय के कथित उपयोग को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया गया। आपत्तिकर्ता पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है और जांच की प्रक्रिया किसी भी तरह प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

अधिवक्ता की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि वक्फ संपत्ति से जुड़े मामलों में उसके निर्धारित उद्देश्य, प्रबंधन व्यवस्था और आय के लेखे-जोखे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


मुस्लिम महासभा ने अपने हितबद्ध होने का आधार भी रखा

आपत्ति में वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 3(r) का उल्लेख करते हुए मुस्लिम महासभा और उसके महासचिव के पक्ष को ‘हितबद्ध व्यक्ति’ की परिभाषा के दायरे में होने का तर्क भी न्यायालय के समक्ष रखा गया।

इस आधार पर आपत्तिकर्ता पक्ष ने अग्रिम जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता और जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।


क्या है पूरा मामला

यह पूरा मामला भोपाल की करीब 2.71 एकड़ यतीमखाना वक्फ संपत्ति से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले में मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की ओर से संपत्ति के प्रबंधन, उससे होने वाली आय और उसके कथित उपयोग को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

इसी मामले में शाहजहांनाबाद थाने में BNS की धारा 318(4) और 316(2) के तहत शाहिद अलीम खान सहित अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

वक्फ बोर्ड की ओर से संपत्ति से संबंधित ₹28 करोड़ 91 लाख से अधिक की रिकवरी की कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई है। बोर्ड के अनुसार इज्तिमा बाजार सहित संपत्ति से जुड़ी अन्य गतिविधियों से प्राप्त आय के हिसाब-किताब को लेकर भी जांच की जा रही है।

हालांकि, आरोपों के संबंध में संबंधित पक्षों द्वारा अपना पक्ष रखा जाना और आरोपों से इनकार किया जाना भी सामने आया है। ऐसे में मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के परिणाम के बाद ही होगी।


अब आगे क्या

अग्रिम जमानत आवेदन खारिज होने के बाद मामले की जांच और आगे की न्यायिक कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। अब यह देखना होगा कि जांच एजेंसी मामले में आगे क्या कदम उठाती है और न्यायालय के समक्ष जांच के दौरान कौन-कौन से तथ्य एवं दस्तावेज सामने आते हैं।


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