(फिरदोस अंसारी)
भोपाल। राजधानी के पुराने शहर के घनी आबादी वाले काजी कैंप इलाके से मध्य प्रदेश ATS ने 12 जून को मोहम्मद फराज को हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तार किया। ATS के अनुसार प्रारंभिक जांच में आरोपी के विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में होने के संकेत मिले हैं। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं उसका संबंध कथित "लोन वुल्फ" हमलों की योजना से जुड़े किसी नेटवर्क से तो नहीं था। ATS का कहना है कि मामले में पाकिस्तान स्थित एक कथित हैंडलर से संभावित संपर्कों की भी जांच की जा रही है। मामले की जांच जारी है। अदालत ने आरोपी को 16 जून तक ATS रिमांड पर भेजा है।
क्लीनिक में काम करता था आरोपी
जानकारी के अनुसार फराज, टीला जमालपुरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले काजी कैंप स्थित कांग्रेस नगर में अपने माता-पिता, पत्नी और बेटी के साथ रहता था। घर से कुछ दूरी पर स्थित एक क्लीनिक में वह कई वर्षों से कार्यरत था।
पड़ोसियों के अनुसार फराज लंबे समय से क्षेत्र में रह रहा था और सामान्य जीवन व्यतीत करता दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने गिरफ्तारी पर आश्चर्य व्यक्त किया है। हालांकि जांच एजेंसियां मामले की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं और अभी जांच प्रारंभिक चरण में है।
दो दशकों में देश विरोधी मामलों की जांच का महत्वपूर्ण केंद्र रहा भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पिछले दो दशकों में आतंकवाद, कट्टरपंथी संगठनों और विदेशी हैंडलर्स से जुड़े मामलों की जांच का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। प्रतिबंधित संगठनों SIMI और हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) से लेकर हाल के वर्षों में सामने आए कथित मॉड्यूलों तक, कई मामलों में ATS, NIA और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई की है।
हालांकि इन मामलों में कई आरोपी अभी भी कानूनी रूप से केवल आरोपी हैं और अधिकांश मामलों में अंतिम न्यायिक निर्णय आना शेष है। आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन का अंतिम अधिकार न्यायालय के पास है।
प्रतिबंधित संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) के कथित नेटवर्क का खुलासा
मई 2023 में मध्य प्रदेश ATS ने भोपाल में प्रतिबंधित संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) के कथित नेटवर्क का खुलासा किया था। बाद में मामले की जांच NIA ने अपने हाथ में ले ली। NIA ने वर्ष 2025 तक इस प्रकरण में कुल 18 आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किए।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि नेटवर्क युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने, गुप्त बैठकों के आयोजन तथा विदेशी संपर्क विकसित करने में सक्रिय था। NIA के अनुसार कुछ आरोपियों पर विदेशी हैंडलर्स के निर्देश पर गतिविधियां संचालित करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
हालांकि इस मामले में अभी तक किसी आरोपी को अदालत द्वारा अंतिम रूप से दोषी घोषित नहीं किया गया है। कुछ आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि अन्य के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी है।
SIMI से जुड़े मामलों के कारण भी चर्चा में रहा भोपाल
प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े कई सदस्य और पदाधिकारी वर्षों तक भोपाल तथा आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों की जांच के दायरे में रहे हैं।
वर्ष 2016 में भोपाल सेंट्रल जेल से SIMI से जुड़े आठ बंदियों के फरार होने और बाद में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रही थी। इस प्रकरण से जुड़े कई कानूनी और जांच संबंधी प्रश्न लंबे समय तक चर्चा का विषय बने रहे। मामले के विभिन्न पहलुओं पर अलग-अलग स्तर पर जांच और न्यायिक प्रक्रियाएं भी चलीं।
जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी तस्वीर
फराज की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भोपाल में सक्रिय पुराने नेटवर्कों के अवशेष अब भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का विषय बने हुए हैं। हालांकि वर्तमान मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, क्योंकि जांच अभी जारी है।
मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और न्यायालयीन प्रक्रिया के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां आरोपी के संपर्कों, गतिविधियों और कथित नेटवर्क से जुड़े संभावित पहलुओं की जांच कर रही हैं।

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