NEET पेपर लीक से इस्तीफे तक: छात्र आंदोलन के आगे झुकी सरकार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद

 



( ई्यूज़ डेस्क)


नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने आखिरकार केंद्र सरकार को बड़ा राजनीतिक फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। लगभग एक महीने तक चले देशव्यापी छात्र आंदोलन, जंतर-मंतर पर लगातार धरना, विपक्ष के हमले और बढ़ते जनदबाव के बीच 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।


कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद


मई–जून 2026 में NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए। कई राज्यों में जांच शुरू हुई और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी  की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे। लाखों छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी वर्षों की मेहनत और भविष्य खतरे में डाल दिया गया है। मामले ने धीरे-धीरे राष्ट्रीय बहस का रूप ले लिया।


जंतर-मंतर बना आंदोलन का केंद्र


20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू हुआ। देखते ही देखते हजारों छात्र, अभिभावक और युवा इस आंदोलन से जुड़ गए। विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने भी समर्थन दिया। देश के कई राज्यों में रैलियां, धरने और प्रदर्शन आयोजित किए गए।


CJP की क्या रही भूमिका


इस आंदोलन को संगठित रूप देने में Cockroach Janta Party (CJP) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। CJP ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी "गैर-समझौतावादी " मांग बताया और सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया। पार्टी के नेताओं ने देशभर के छात्रों को एक मंच पर लाने, जंतर-मंतर पर आंदोलन को लगातार जारी रखने और सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। अंततः मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।


सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल बनी आंदोलन का टर्निंग पॉइंट


प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस आंदोलन से जुड़े और 28 जून से आमरण अनशन पर बैठ गए। उनका अनशन करीब 26 दिनों तक चला। इस दौरान उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और उनका वजन भी काफी कम हुआ। सरकार से आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त किया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल एक इस्तीफा नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और व्यापक सुधार है। मंत्री के इस्तीफे के बाद उन्होंने इसे "लोकतंत्र की जीत" बताते हुए कहा कि अब अगला लक्ष्य शिक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार होना चाहिए।


संसद से सड़क तक बढ़ा दबाव


संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। सरकार ने जांच और सुधार का भरोसा दिया, लेकिन आंदोलनकारी केवल सुधार नहीं बल्कि राजनीतिक जवाबदेही की मांग पर अड़े रहे।


पुलिस कार्रवाई से बढ़ा आक्रोश


संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग की। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद आंदोलन को देशभर से और अधिक समर्थन मिलने लगा।


सरकार आखिर क्यों झुकी


सरकार पर लगातार बढ़ते दबाव के पीछे कई कारण रहे—
- देशभर में लगातार छात्र आंदोलन।
- परीक्षा प्रणाली पर जनता का घटता भरोसा।
- विपक्ष का संसद और सड़क पर लगातार विरोध।
- पुलिस कार्रवाई के बाद छात्रों के प्रति बढ़ती जनसहानुभूति।
युवाओं में रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बढ़ता असंतोष।
इन परिस्थितियों में सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने का फैसला किया।


धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा


25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे नहीं चाहते कि मौजूदा स्थिति का गलत फायदा उठाया जाए।


इस्तीफे के बाद जश्न


मंत्री के इस्तीफे की घोषणा होते ही जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों और प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाईं, तिरंगा लहराया, नारे लगाए और जीत का जश्न मनाया। CJP नेताओं ने इसे युवाओं की एकजुटता की जीत बताया और शांतिपूर्ण ढंग से घर लौटने की अपील की। कई विपक्षी नेताओं ने भी इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही की जीत बताया। हालांकि अनेक छात्र नेताओं ने कहा कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और वे शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार होने तक अपनी आवाज उठाते रहेंगे।


2014 के बाद मोदी सरकार में इस्तीफा देने वाले प्रमुख केंद्रीय मंत्री


हरसिमरत कौर बादल (सितंबर 2020)
पद: केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री
कारण: तीन कृषि कानूनों के विरोध में एनडीए सरकार और मंत्रिमंडल से इस्तीफा।

धर्मेंद्र प्रधान (25 जुलाई 2026)
पद: केंद्रीय शिक्षा मंत्री
कारण: NEET-UG पेपर लीक विवाद, परीक्षा प्रणाली पर सवाल और देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद इस्तीफा।

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