इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, मास्टरमाइंड समेत तीन गिरफ्तार

 



(विशेष संवाददाता)

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम (IMC) फर्जी बिल घोटाले के बहुचर्चित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड और नगर निगम के पूर्व सहायक अभियंता अभय राठौर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अन्य आरोपियों में ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल वाडेरा शामिल हैं। तीनों को विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए ईडी रिमांड पर भेजा गया।

92 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता

ईडी की जांच में अब तक लगभग 92 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार नगर निगम में वर्षों तक ऐसे निर्माण और ड्रेनेज कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया, जो वास्तविक रूप से हुए ही नहीं थे। फर्जी बिल, कूटरचित दस्तावेज और भुगतान आदेश तैयार कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

घोटाले का मास्टरमाइंड पहले भी हो चूका है गिरफ्तार

अभय राठौर नगर निगम में सहायक अभियंता के पद पर पदस्थ रहा है। प्रारंभिक जांच में उसे पूरे घोटाले का प्रमुख सूत्रधार माना गया है। आरोप है कि उसने कुछ ठेकेदारों सहित अन्य संबंधित लोगों के साथ मिलकर फर्जी कार्यों के बिल तैयार करवाए और भुगतान की प्रक्रिया को अंजाम दिया। वर्ष 2024 में मामला उजागर होने के बाद उसे निलंबित कर दिया गया था तथा बाद में पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया था।

2019 से 2023 के बीच खेला गया घोटाले का खेल

जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच कागजों पर ड्रेनेज और अन्य विकास कार्य दिखाकर करोड़ों रुपये के बिल तैयार किए गए। नगर निगम की आंतरिक जांच में निजी ठेकेदारों और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत का खुलासा हुआ था। इसके बाद कई एफआईआर दर्ज की गईं और आर्थिक अपराधों की जांच शुरू हुई।

पहले भी हुई थीं छापेमारी और संपत्ति कुर्की

गौरतालाब है कि ईडी इससे पहले 20 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। जांच एजेंसी ने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में आरोपियों से जुड़ी 43 अचल संपत्तियां भी अटैच की थीं, जिनकी कीमत लगभग 34 करोड़ रुपये बताई गई है। छापों के दौरान नकदी, बैंक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जब्त किए गए थे।

बढ़ सकती है आरोपियों की संख्या

सूत्रों के अनुसार ईडी अब धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी भुगतान से अर्जित राशि किन-किन लोगों तक पहुंची और उसे कहां निवेश किया गया। जांच के आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ