ऐशबाग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी पर संकट: 600 जर्जर मकानों के ध्वस्तीकरण का विरोध तेज, पुनर्वास से पहले कार्रवाई न करने की मांग

 



(शहर संवाददाता)


भोपाल। राजधानी की ऐशबाग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में स्थित करीब 600 जर्जर मकानों को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला बड़ी संख्या में कॉलोनी के रहवासियों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जनसुनवाई में ज्ञापन सौंपकर मांग की कि पुनर्वास की समुचित व्यवस्था किए बिना किसी भी परिवार का मकान नहीं तोड़ा जाए।

ज्ञापन में कहा गया कि ऐशबाग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में वर्षों से सैकड़ों परिवार निवास कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा मकानों को जर्जर बताते हुए ध्वस्तीकरण की तैयारी की जा रही है, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास या पुनर्वास की कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है। ऐसे में सीधे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हजारों लोगों को बेघर कर सकती है।


प्रशासन सुरक्षा का दे रहा हवाला

हाउसिंग बोर्ड और जिला प्रशासन का कहना है कि कॉलोनी के कई मकान काफी पुराने हो चुके हैं और उनकी संरचनात्मक स्थिति कमजोर है। कई भवनों में दरारें आने, प्लास्टर गिरने और अन्य क्षति के कारण उन्हें असुरक्षित माना गया है। विशेष रूप से बारिश के मौसम में किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए प्रशासन इन भवनों को खाली कराने और ध्वस्त करने की तैयारी कर रहा है।


दूसरा ठिकाना नहीं कहा जाये,रहवासियों ने उठाए सवाल

कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि वे वर्षों से इन मकानों में रह रहे हैं और अधिकांश परिवारों के पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। उनका कहना है कि यदि सरकार लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है तो पहले सभी प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए, उसके बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाए।

रहवासियों का यह भी कहना है कि पुनर्विकास (री-डेवलपमेंट) की स्पष्ट योजना सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों को भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।


कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने प्रशासन से मांग

- पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना किसी भी मकान को नहीं तोड़ा जाए।
- सभी प्रभावित परिवारों को पहले वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए।
- पुनर्विकास की पूरी योजना सार्वजनिक की जाए।
- रहवासियों के साथ चर्चा कर उनकी सहमति से आगे की कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि लोगों की जान की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर हजारों लोगों को बेघर करना उचित नहीं होगा।


ऐशबाग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का यह मामला अब केवल जर्जर भवनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जन सुरक्षा और मानवीय पुनर्वास के बीच संतुलन स्थापित करने की बड़ी चुनौती बन गया है।

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