एमपी वक्फ बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्य, भोपाल में फूटा मुस्लिम संगठनों का गुस्सा; फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

 



(शहर संवाददाता)


भोपाल। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव की नियुक्ति के विरोध में सोमवार को  भोपाल के बुधवारा चौराहे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के फैसले को वक्फ संस्थाओं की स्वायत्तता पर हस्तक्षेप बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।


गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं


प्रदर्शन के दौरान "वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य मंजूर नहीं", "सरकारी दखल बंद करो", "फैसला वापस लो" जैसे नारे गूंजे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कहा कि वक्फ बोर्ड मुस्लिम समाज की धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन के लिए गठित संस्था है, इसलिए इसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं है।


सरकार फैसला वापस ले..


ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी शमशुल हसन ने कहा, "हम कभी किसी गैर-मुस्लिम धार्मिक संस्था में अपने समाज के लोगों को सदस्य बनाने की मांग नहीं करते। फिर वक्फ बोर्ड जैसी मुस्लिम धार्मिक संस्था में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का क्या औचित्य है? सरकार को यह फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए।"


सरकार का वक्फ मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप -मसूद


कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मीडिया से चर्चा में कहा कि वक्फ बोर्ड धार्मिक और सामुदायिक संस्था है तथा इसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति मुस्लिम समाज की भावनाओं के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वक्फ मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रही है। मसूद ने कहा कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो लोकतांत्रिक और कानूनी स्तर पर विरोध और तेज होगा।


गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में संशोधित वक्फ कानून के तहत 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। बोर्ड में अध्यक्ष के रूप में सनवर पटेल को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि पहली बार मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को गैर-मुस्लिम सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इन्हीं नियुक्तियों को लेकर प्रदेश में विवाद गहराता जा रहा है।


प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने नियुक्तियां निरस्त नहीं कीं तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल दो सदस्यों की नियुक्ति का मामला नहीं, बल्कि वक्फ संस्थाओं की स्वायत्तता और धार्मिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।

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