जगह-जगह धंसी सड़कें, गड्ढों में भरा पानी; लालघाटी के विजय नगर में सड़क में धंसीं कारें, लगा लंबा जाम
(शहर संवाददाता)
भोपाल। राजधानी में लंबे समय बाद हुई एक रात की बारिश ने सड़कों की गुणवत्ता और जिम्मेदारों की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। जिन पक्की सड़कों पर रोजाना भारी वाहन फर्राटा भरते हैं, वही सड़कें बारिश के बाद जगह-जगह धंस गईं। गड्ढों में पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। नतीजा, राहगीरों से लेकर वाहन चालकों तक की जान जोखिम में है।
बारिश थमने के कुछ घंटे बाद ही राजधानी की सड़कों का हाल ऐसा हो गया, मानो सड़कें नहीं बल्कि जगह-जगह ‘खतरे के गड्ढे’ बिछे हों। सबसे गंभीर स्थिति उन स्थानों पर है, जहां सड़क के नीचे की जमीन धंसने से गड्ढे गहरे हो गए और उनमें बारिश का पानी भर गया।
विजय नगर में सड़क बनी ‘दलदल’, धंसीं कारें
इसका प्रत्यक्ष उदाहरण सोमवार सुबह करीब 8 बजे लालघाटी स्थित विजय नगर के व्यस्त इलाके में देखने को मिला। यहां सड़क पर पानी भरे गड्ढे में स्कार्पियो सहित कई कारों के पहिए धंस गए। वाहन चालकों ने काफी कोशिश की, लेकिन जब गाड़ियां नहीं निकल सकीं तो मजबूरी में उन्हें मौके पर ही छोड़कर जाना पड़ा।
एक के बाद एक वाहन फंसने से सड़क पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई और देखते ही देखते लंबा जाम लग गया। व्यस्त मार्ग पर वाहनों की कतार लगने से दूसरे वाहन चालकों और राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?
पानी ने छिपाए गड्ढे, बढ़ा हादसे का खतरा
बारिश के बाद सड़क पर जमा पानी ने स्थिति और खतरनाक कर दी है। वाहन चालक जब सामान्य सड़क समझकर आगे बढ़ते हैं तो अचानक पहिया गहरे गड्ढे में जा धंसता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए तो यह स्थिति और भी ज्यादा जोखिम भरी है।
तेज रफ्तार में गड्ढे का अंदाजा नहीं लगने पर वाहन अनियंत्रित होकर पलट सकता है। वहीं कारों के पहिए धंसने से वाहन बीच सड़क पर खड़े हो जाते हैं और जाम की स्थिति बन जाती है।
सवाल सड़क की मजबूती पर भी
राजधानी में सड़क निर्माण और मरम्मत पर हर साल बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद बारिश की पहली गंभीर मार में सड़कें जवाब देने लगें तो सवाल उठना लाजिमी है। क्या सड़कों का निर्माण मानकों के अनुरूप हुआ था? क्या सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच की गई? क्या बारिश से पहले कमजोर हिस्सों को चिह्नित कर उनकी मरम्मत कराई गई थी?
विजय नगर की घटना महज एक सड़क पर कारों के फंसने की कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जो बारिश के बाद होने वाली ऐसी स्थिति से निपटने के दावे तो करती है, लेकिन जमीन पर उसकी तैयारी नजर नहीं आती।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इन गड्ढों को भरकर केवल ‘मरम्मत की खानापूर्ति’ करता है या सड़क धंसने की असली वजह और निर्माण की गुणवत्ता की भी जांच होगी।
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