स्कूल के मैदान में कीचड़ और गंदगी, क्या बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे?

 


(शहर संवाददाता)

भोपाल। राजधानी के टीला जमालपुरा स्थित शासकीय माध्यमिक शाला, जो नगर निगम के वार्ड क्रमांक 13 के अंतर्गत आती है, की तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। एक ओर स्कूल भवन पर बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का संदेश दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर स्कूल परिसर और मैदान की स्थिति चिंताजनक नजर आ रही है।

सामने आई तस्वीरों में स्कूल के मैदान में कीचड़, गंदा पानी, कचरा और बिखरा हुआ प्लास्टिक दिखाई दे रहा है। बारिश के बाद हालात और खराब हो गए हैं। ऐसे माहौल में स्कूल आने वाले बच्चों को मैदान में चलते समय फिसलने, गिरने और चोटिल होने का खतरा बना हुआ है।

  बीमारी का खतरा

स्कूल परिसर में जमा गंदगी और पानी महज बदसूरती का मामला नहीं है। लंबे समय तक पानी जमा रहने और कचरा पड़े रहने से मच्छरों के पनपने तथा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए ऐसे स्थानों पर नियमित सफाई और जल निकासी बेहद जरूरी है।

सवाल यह है कि जिस परिसर में बच्चे रोजाना कई घंटे बिताते हैं, वहां स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना किसकी जिम्मेदारी है?


पास में निजी स्कूलों की बेहतर व्यवस्था, फिर सरकारी स्कूल क्यों पीछे

इस पूरे मामले का सबसे चुभने वाला पहलू यह है कि इसी विद्यालय के आसपास लगभग आधा दर्जन से अधिक निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर नजर आने वाली स्थिति में इन निजी स्कूलों के परिसरों के आसपास सफाई व्यवस्था सरकारी स्कूल की तुलना में कहीं बेहतर दिखाई देती है।


ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है

क्या सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे कम महत्वपूर्ण हैं?

क्या उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण में पढ़ने का अधिकार किसी निजी स्कूल के बच्चे से कम है?

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे भी इसी समाज और शहर का भविष्य हैं। उनके लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्कूल परिसर उपलब्ध कराना किसी एहसान का विषय नहीं, बल्कि व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

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बारिश के मौसम में स्कूल परिसर में जलभराव और कीचड़ बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। यदि मैदान में कचरा और गंदा पानी जमा है, तो बच्चों के खेलकूद और अन्य गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।


शिक्षा विभाग और नगर निगम की निगरानी पर सवाल

यह मामला केवल स्कूल प्रबंधन का नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने हाल ही में स्कूल का निरीक्षण किया है?

क्या नगर निगम वार्ड क्रमांक 13 के जिम्मेदार अधिकारियों को स्कूल परिसर की स्थिति की जानकारी है?

यदि जानकारी है तो अब तक सफाई और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

और यदि जानकारी नहीं है, तो सवाल यह है कि मैदानी निरीक्षण आखिर हो कहां रहा है?

स्कूल केवल चार दीवारों और ब्लैकबोर्ड का नाम नहीं है। बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण देना भी शिक्षा व्यवस्था की मूल जिम्मेदारी है।


अब कार्रवाई होगी या फाइलों में ही चलेगी सफाई

तस्वीरें सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके का निरीक्षण कर सफाई, जल निकासी, कीचड़ हटाने और मच्छर नियंत्रण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

जरूरत इस बात की भी है कि केवल अस्थायी सफाई कर मामले को खत्म न किया जाए, बल्कि यह पता लगाया जाए कि बारिश के दौरान स्कूल परिसर में बार-बार ऐसी स्थिति क्यों बनती है और इसका स्थायी समाधान क्या है।

क्योंकि सवाल सिर्फ कीचड़ और गंदगी का नहीं है। सवाल उन बच्चों की सुरक्षा का है, जिन्हें हर दिन इसी परिसर में पढ़ने आना है।

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