(फिरदोस अंसारी)
भोपाल। सरकारी दफ्तर में बाबू की कुर्सी और बाहर खड़ी चमचमाती महंगी कार इन दिनों बैरागढ़ एसडीएम वृत्त में चर्चा का विषय बनी हुई है। भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) से प्रतिनियुक्ति पर आए एक बाबू की कथित लग्जरी लाइफ को लेकर विभाग में चर्चाएं हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित बाबू करीब एक दशक से प्रतिनियुक्ति पर इसी वृत्त में जमे हुए हैं। बताया जा रहा है कि बाबू ने हाल ही में एक सफेद महंगी कार की सवारी शुरू कर दी है। कभी छोटी तो कभी बड़ी गाड़ी से दफ्तर पहुंचने पर विभागीय कर्मचारियों के दिल की आह मुंह से बाहर आ जाती है और निकल ही पड़ता है कि जलवे तो बाबू जी के हैं।
महंगी कार से कार्यालय आने वाले इस कर्मचारी की जीवनशैली पर सवाल उठना अपने आप में कोई आरोप नहीं है। कोई भी व्यक्ति अपनी वैध आय से महंगी कार खरीद सकता है। सवाल यह है कि क्या बाबू की लाइफ स्टाइल में आए अचानक बदलाव विभाग के नियमों की अनदेखी तो नहीं? लेकिन मामला तब गंभीर सवाल खड़े करता है, जब कर्मचारियों और विभागीय कार्य से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार के जरिए मांगी जाए और उसका कोई जवाब ही न दिया जाए।
सूचना के अधिकार के माध्यम से संबंधित कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति अवधि, विभागीय स्थिति और अचल संपत्ति संबंधी जानकारी मांगी गई। खास तौर पर यह जानने की कोशिश की गई कि कर्मचारी द्वारा नियमानुसार संपत्ति संबंधी विवरण विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया गया है या नहीं। इन प्रकरणों में अपीलीय अधिकारी द्वारा भी जानकारी को व्यक्तिगत बताते हुए सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। जबकि इसी तरह के अन्य प्रकरणों में राज्य सूचना आयोग जानकारी दिए जाने के आदेश कर चुका था।
यहीं से सवाल उठता है कि यदि सरकारी कर्मचारी से नियमानुसार संपत्ति संबंधी विवरण लिया जाता है तो उसके विभागीय रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी को पूरी तरह व्यक्तिगत बताने का आधार क्या है?
बीपीएल शाखा में ‘टीम’ पर भी नजर
बैरागढ़ वृत्त की बीपीएल शाखा में इस बाबू के साथ अन्य विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारी के काम करने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि दोनों कर्मचारियों को कौन-कौन से काम सौंपे गए हैं और क्या उनके कार्यक्षेत्र के लिए सक्षम स्तर से आदेश जारी हुए हैं।
शहर और गोविंदपुरा वृत्त में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका
शहर और गोविंदपुरा वृत्त में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों से महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य लिए जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि गोविंदपुरा एसडीएम के रीडर का काम भी आउटसोर्स कर्मचारी से लिया जा रहा है।
सवाल यह है कि जब पात्र और विभागीय कर्मचारी मौजूद हैं तो आउटसोर्स कर्मचारियों से जिम्मेदारी वाले काम क्यों लिए जा रहे हैं? किसी प्रशासनिक चूक की स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी?

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