2011 तक भोपाल में 860 अतिक्रमण प्रकरण दर्ज थे, 45 साल पहले सरकार ने भी कब्रिस्तानों से कब्जे हटाने के दिए थे निर्देश
(फिरदोस अंसारी)
भोपाल। राजधानी में वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कब्रिस्तान की ज़मीन पर कब्जे के प्रकरण ने मामला गरमा दिया हे। हाल ही में नरेला शंकरी स्थित वक्फ कब्रिस्तान की जमीन पर कथित कब्जे की शिकायत पुलिस थाने तक पहुंची है। कमेटी इंतजामिया औकाफ-ए-आम्मा ने 17 सितंबर को क्षेत्रीय थाने को पत्र जारी कर मामले में वैधानिक कार्रवाई और वक्फ संपत्ति की सुरक्षा की मांग की है।
कमेटी के पत्र में वक्फ कब्रिस्तान नरेला शंकरी, पंजीयन क्रमांक 1080 तथा खसरा नंबर 157/2 और 87/1/1 का उल्लेख है। पत्र के मुताबिक संबंधित प्लॉट वर्ष 2014 से शेख लतीफ पुत्र शेख जमील के नाम किराये पर था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में आनंद प्रजापति और ज्योति प्रजापति ने प्लॉट पर कब्जा कर लिया। शिकायतकर्ता ने उसे प्लॉट पर आने से रोकने के लिए धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। सूत्रों के अनुसार कब्रिस्तान की भूमि पर पक्के निर्माण किये जा चुके। राजधानी में जहां वक़्फ बोर्ड का मुख्य कार्यालय है, यहाँ जब बे-रोक टोक कब्जा कर पक्के निर्माण किये जा रहे हे तो अन्य क्षेत्रों का क्या हाल होगा ये सवाल स्वाभाविक है।
कमेटी ने पुलिस से मामले की जांच कर कार्रवाई करने तथा वक्फ संपत्ति को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया है।
3.60 एकड़ का बताया गया है कब्रिस्तान
प्राप्त जानकारी के अनुसार वक्फ रिकॉर्ड में कब्रिस्तान नरेला शंकरी, तहसील हुजुर नाम से यह संपत्ति दर्ज है और इसका रकबा 3.60 एकड़ बताया गया है। यह लगभग 1.57 लाख वर्गफीट के बराबर है। ऐसी स्थिति में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि कब्रिस्तान की पूरी जमीन का वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड क्या है, उसमें कितनी जमीन मौके पर उपलब्ध है और कहीं अलग-अलग हिस्सों पर कब्जे या अन्य उपयोग तो नहीं हो रहे हैं।
2011 तक भोपाल में 860 अतिक्रमण मामले
मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध जिला-वार अतिक्रमण रिकॉर्ड 30 जून 2011 तक का है। इसमें प्रदेश में कुल 3,245 अतिक्रमण प्रकरण दर्ज बताए गए हैं। इनमें 964 का निपटारा, 2,281 मामले लंबित और छह मामलों में अतिक्रमण हटाया जाना दर्ज है।
इसी रिकॉर्ड में भोपाल में 860 अतिक्रमण प्रकरण दर्ज थे। इनमें 165 निपटाए गए, 695 लंबित और दो मामलों में अतिक्रमण हटाया जाना दर्ज है।
हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 695 को आज के लंबित मामलों की संख्या नहीं माना जा सकता, क्योंकि बोर्ड की ऑनलाइन जिला-वार तालिका स्वयं 30 जून 2011 तक की स्थिति बताती है। पिछले कई वर्षो के मामले वेबसाइट पर अपडेट नहीं है।
इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह् है कि 2011 के बाद भोपाल में वक्फ संपत्तियों पर कितने नए अतिक्रमण के मामले दर्ज हुए और पुराने मामलों का क्या हुआ?
45 साल पहले भी सरकार ने दिए थे निर्देश
कब्रिस्तानों की जमीन पर कब्जे का मुद्दा नया नहीं है। मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 16 फरवरी 1981 को सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कब्रिस्तानों पर अतिक्रमण की शिकायतों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
शासन ने राजस्व अधिकारियों से कब्रिस्तानों की जमीन की जांच कराने, अतिक्रमण के प्रकरण दर्ज करने और नियमानुसार अतिक्रमण हटाने को कहा था। पत्र में यह भी कहा गया था कि यदि पटवारी द्वारा अतिक्रमण की जानकारी छिपाई गई हो तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
यानी करीब 45 साल पहले सरकार ने कब्रिस्तानों की जमीन बचाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए थे, लेकिन 2026 में नरेला शंकरी से फिर कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जे की शिकायत सामने आने से मामला चर्चाओ मे है।
CAG रिपोर्ट ने भी वक्फ संपत्तियों की स्थिति पर सवाल उठाए
मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के कामकाज से जुड़ी CAG की रिपोर्ट भी इस मामले की पृष्ठभूमि को महत्वपूर्ण बनाती है। CAG की रिपोर्ट में बोर्ड द्वारा 157 अतिक्रमित वक्फ संपत्तियों की सूची दिए जाने का उल्लेख है। इनमें से 18 मामलों की नमूना जांच की गई और कई मामलों में कार्रवाई लंबित पाई गई। शासन ने धारा 54 के तहत 3,000 से अधिक मामले लंबित होने की जानकारी भी दी थी।
Comptroller and Auditor General of India
रिपोर्ट में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड और राजस्व रिकॉर्ड के बीच विसंगतियों से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। इसलिए नरेला शंकरी के मामले में केवल कब्जे की शिकायत ही नहीं, बल्कि वक्फ रिकॉर्ड और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा।
भोपाल में वक्फ संपत्तियों को लेकर पहले भी विवाद
भोपाल में वक्फ संपत्तियों के कब्जे और प्रबंधन को लेकर पिछले वर्षों में कई मामले सामने आए हैं। 2025 में वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष के हवाले से भोपाल में कई वक्फ संपत्तियों पर कब्जे और किराया नहीं मिलने की बात कहीं गई थी।
EOW ने किया मामला दर्ज
जनवरी 2026 में EOW ने वक्फ बोर्ड की 185 संपत्तियों को नियमों की अनदेखी कर कम किराये पर दिए जाने के मामले में FIR दर्ज की थी। रिपोर्ट में इन संपत्तियों का कुल क्षेत्रफल करीब 83,390 वर्गफीट और गाइडलाइन के अनुसार मूल्य 59 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया।
28.91 करोड़ रुपये की रिकवरी नोटिस के साथ पुलिस थाने मे प्रकरण दर्ज
अगस्त 2026 में शाहजहानाबाद क्षेत्र की करीब 2.7 एकड़ वक्फ जमीन को लेकर भी कब्जे का मामला सामने आया, जिसमें FIR और 28.91 करोड़ रुपये की रिकवरी का नोटिस जारी किए जाने की रिपोर्ट हुई।
नरेला शंकरी में अब जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति नरेला शंकरी में हाल ही में सरकारी जमीन से भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी। प्रशासन ने करीब 10,760 वर्गफीट सरकारी जमीन से 20 दुकानें और दो मकान हटाने की कार्रवाई की थी और जमीन का बाजार मूल्य करीब 15 करोड़ रुपये बताया गया था। यह मामला वक्फ कब्रिस्तान वाले मामले से अलग है, लेकिन दोनों घटनाएं एक ही क्षेत्र नरेला शंकरी में हुई हैं।
वक्फ बोर्ड की वेबसाइट पर 2011 तक भोपाल में 860 अतिक्रमण प्रकरण दर्ज थे। 15 साल बाद 2026 में नरेला शंकरी के कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जे की शिकायत सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि 2011 के बाद भोपाल में वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण का वास्तविक आंकड़ा क्या है और अब तक कितनी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई?

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