बैतूल में 17 साल की छात्रा की मौत के बाद फिर चर्चा में आया तेज DJ
इंदौर में प्रतिबंध और जब्ती तक कार्रवाई, भोपाल में निर्देश तो हुए, लेकिन सख्ती के उदाहरण कम
(फिरदोस अंसारी)
भोपाल/बैतूल। त्योहार खुशियां बांटने के लिए होते हैं, लेकिन जब उत्सव का शोर जानलेवा सवाल खड़े करने लगे तो प्रशासन की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में आ जाती है। बैतूल में गणेश विसर्जन कार्यक्रम के दौरान 17 वर्षीय छात्रा प्रतीक्षा वर्मा की अचानक मौत के बाद तेज DJ को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
प्रतीक्षा जेएच कॉलेज परिसर में गणेश विसर्जन कार्यक्रम में पहुंची थी। इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश होकर गिर गई। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार ने तेज DJ को उसकी तबीयत बिगड़ने की वजह बताया है। हालांकि पुलिस ने अभी DJ को मौत का प्रमाणित कारण नहीं माना है और पोस्टमार्टम तथा जांच के निष्कर्ष का इंतजार है।
पांच साल में कई घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां DJ या अत्यधिक तेज आवाज के बीच लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। कुछ मामलों में डॉक्टरों ने हृदय संबंधी कारण बताए, जबकि कुछ में परिवारों ने तेज आवाज को जिम्मेदार माना।
मध्यप्रदेश के उज्जैन में 2022 में 18 वर्षीय युवक की शादी समारोह में DJ पर नाचते समय मौत हुई थी। पोस्टमार्टम में हृदय में खून का थक्का मिलने की बात सामने आई थी और डॉक्टर ने तेज DJ को संभावित कारण बताया था।
सीतामढ़ी, बिहार में 2023 में भी शादी समारोह के दौरान तेज DJ के बीच 22 वर्षीय युवक की मौत की रिपोर्ट सामने आई।
2024 भोपाल में 13 वर्षीय बच्चे की DJ की आवाज के दौरान मौत का मामला सामने आया था। रिपोर्टों में उसके पहले से हृदय संबंधी समस्या होने की बात भी सामने आई थी।
इंदौर में प्रतिबंध, निगरानी और जब्ती तक कार्रवाई
DJ को लेकर इंदौर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई इस समय ज्यादा स्पष्ट और सख्त दिखाई देती है।
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने 3 सितंबर 2026 को जिले में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित और नियम विरुद्ध इस्तेमाल पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया। आदेश 22 अक्टूबर तक प्रभावी है। इसमें बिना अनुमति लाउडस्पीकर, बैंड, प्रेशर हॉर्न आदि के इस्तेमाल पर रोक तथा सामान्यतः अधिकतम दो मध्यम आकार के लाउडस्पीकर की अनुमति का प्रावधान बताया गया है।
अनंत चतुर्दशी के ऐतिहासिक झांकी चल समारोह के लिए इंदौर प्रशासन ने इससे भी आगे बढ़कर DJ पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया और प्रत्येक झांकी में अधिकतम दो स्पीकर की व्यवस्था रखी। नियम तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
पुलिस की कार्रवाई भी केवल निर्देशों तक सीमित नहीं रही। सितंबर 2026 में इंदौर पुलिस ने अधिकृत अनुमति के बिना और निर्धारित डेसीबल सीमा से अधिक आवाज में DJ चलाने वाले छह वाहनों और करीब 15 लाख रुपये के साउंड सिस्टम जब्त किए। संबंधित संचालकों के खिलाफ प्रकरण भी दर्ज किए गए।
पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में इससे पहले भी तेज आवाज में DJ चलाने वाले वाहन से साउंड सिस्टम जब्त करने की कार्रवाई दर्ज है। एक मामले में DJ, एम्पलीफायर और अन्य उपकरण जब्त किए गए तथा संबंधित संचालक के खिलाफ मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम सहित संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई।
भोपाल में बैठक और निर्देश तो हुए, लेकिन सवाल कार्रवाई का
भोपाल पुलिस ने भी आगामी त्योहारों को लेकर DJ संचालकों की बैठक कर उन्हें निर्धारित डेसीबल सीमा और समय का पालन करने के निर्देश दिए। पुलिस के अनुसार नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में DJ पर चार स्पीकर लगाने को लेकर भी सहमति बनी थी।
लेकिन बैतूल की घटना के बाद सवाल यह है कि क्या केवल बैठक और निर्देश पर्याप्त हैं ?
इंदौर में जहां प्रशासन ने पहले ही झांकी समारोह में DJ प्रतिबंधित कर दिया और पुलिस ने नियम तोड़ने वालों के DJ वाहन तथा साउंड सिस्टम जब्त किए, वहीं भोपाल में ऐसे ही स्तर की कार्रवाई के सार्वजनिक उदाहरण अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं।
क्या मौत के बाद ही जागेगा प्रशासन...?
बैतूल की 17 वर्षीय प्रतीक्षा की मौत का अंतिम कारण अभी जांच का विषय है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि उसकी जान केवल DJ की आवाज के कारण गई।
सवाल यह है....
अगर नियम पहले से मौजूद हैं तो उनका पालन कराने के लिए प्रशासन को किसी हादसे का इंतजार है ?
इंदौर की हालिया कार्रवाई बताती है कि प्रशासन केवल निर्देश जारी करने के बजाय प्रतिबंध, निगरानी और जब्ती जैसे कदम भी उठा सकता है।

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