शाही औकाफ की जमीन पर कार्रवाई से मचा हड़कंप, DGP-पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन
(फिरदोस अंसारी)
भोपाल। भोपाल में मेट्रो का काम एक बार फिर शाही औकाफ की जमीन को लेकर विवादों में आ गया है। सोमवार देर रात शाही कब्रिस्तान में मेट्रो से जुड़ी टीम के पहुंचने और काम शुरू करने की सूचना से इलाके में हलचल मच गई। खबर मिलते ही विधायक आतिफ अकील मौके पर पहुंचे और कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए काम रुकवाया।
मामला यहीं नहीं रुका। ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल, मध्य प्रदेश ने मंगलवार को पुलिस कमिश्नर, भोपाल और पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन देकर पूरी घटना की जांच कराने और विवादित जमीन पर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने की मांग की।
देर रात में पहुंची टीम, विधायक भी पहुंचे
प्राप्त जानकारी के अनुसार कि सोमवार की देर रात करीब 1:30 बजे मेट्रो से जुड़ी टीम शाही कब्रिस्तान के पास पहुंची। यहां बैरिकेडिंग और अन्य प्रारंभिक काम शुरू करने की कार्यवाही की जा रही थी।
इसकी जानकारी मिलने पर विधायक आतिफ अकील मौके पर पहुंचे। उन्होंने मेट्रो अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर जानकारी ली और काम रोकने को कहा। मौके पर काफी देर तक बातचीत हुई। इसके बाद वहां रखा सामान हटाने की बात भी सामने आई।
विवाद का कारण
दरअसल, यह विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ है। भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन के फेज-2 में सुभाषनगर से करोंद तक मेट्रो ले जाने की योजना है। इस हिस्से में करीब 3.39 किलोमीटर का भूमिगत रूट प्रस्तावित है।
इसी प्रस्तावित रूट को लेकर शाही कब्रिस्तान के नीचे से सुरंग निकालने पर वक्फ पक्ष ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जमीन कब्रिस्तान की है और वहां बड़ी संख्या में पुरानी कब्रें हैं। इसलिए किसी भी निर्माण से पहले संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अनुमति का पालन जरूरी है।
मामला वक्फ अधिकरण तक पहुंच चुका है
इस जमीन को लेकर विवाद पहले ही वक्फ अधिकरण तक पहुंच चुका है। यानी जमीन और मेट्रो रूट को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
इसी वजह से अब 5 अक्टूबर की रात हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब मामला कानूनी प्रक्रिया में है तो मौके पर कार्रवाई किस आधार पर की गई।
नारियलखेड़ा की जमीन भी विवाद में
मेट्रो को लेकर दूसरा विवाद नारियलखेड़ा की वक्फ निशात अफजा (वाके बाग) जमीन से जुड़ा है। यहां भी मेट्रो परियोजना के काम को लेकर वक्फ पक्ष ने आपत्ति जताई है।
इस तरह भोपाल में मेट्रो परियोजना और वक्फ जमीन से जुड़े दो प्रमुख स्थानों ,शाही कब्रिस्तान और नारियलखेड़ा को लेकर विवाद सामने आया है।
मिल्ली काउंसिल ने कहा....
ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल ने अपने ज्ञापन में कहा है कि संवेदनशील धार्मिक स्थल पर किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को सूचना दी जानी चाहिए।
काउंसिल ने रखी मांग
- 5 अक्टूबर की देर रात हुई कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच हो।
- विवाद का कानूनी समाधान होने तक यथास्थिति रखी जाए।
- भविष्य में ऐसी जगह पर कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को सूचना दी जाए।
- किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई न हो।
- जांच में नियमों की अनदेखी सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।
विकास से ऐतराज नहीं, तरीका कानून के मुताबिक हो
मिल्ली काउंसिल ने साफ किया है कि वह मेट्रो या विकास कार्यों के खिलाफ नहीं है। उसका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ कानून, संविधान और नागरिकों के वैधानिक अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

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