(शाहिद कामिल )
हम ऐसे रहनुमाओं की योमे पैदाइश मनाते हैं जिन्होंने आपका बेड़ा गर्क किया है .हम उन्हें भूल जाते हैं जो आपके लिए ऐसा कुछ कर गए जो आपकी आने वाली तमाम पीढ़ियों के लिए तालीम का आफताब बनकर चमकता रहेगा.
ऐसा किया है तूने हर दिल में ठिकाना
गाते रहेगें लोग सर सैय्यद का तराना
इल्मो अदब के तूने जलाये है वो चराग़
मुमकिन नही है तुझको भुला दे ये ज़माना
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आज सैयद अहमद खान यानी सर सैयद अहमद खान साहब का जन्मदिन है. हम ऐसे रहनुमाओं की यो मे पैदाइश मनाते हैं जिन्होंने आपका बेड़ा गर्क किया है हम उन्हें भूल जाते हैं जो आपके लिए ऐसा कुछ कर गए जो आपकी आने वाली तमाम पीढ़ियों के लिए तालीम का आफताब बनकर चमकता रहेगा.
यह वह शख्सियत है जिसने मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए बीड़ा उठाया. या यूं कहें कि मदरसों की परंपरागत पढ़ाई से हटकर आधुनिक शिक्षा की उस दौर में शुरुआत कर दी जब मुसलमानों के लिए पढ़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था. साल 2017 पहले अलीगढ़ जाने का मौका मिला. किताबों में पड़े और लोगों से सुने हुए सर सैयद अहमद की असल शख्सियत वहां जाकर पता चली. सैकड़ों एकड़ में फैली मुस्लिम अलीगढ़ यूनिवर्सिटी को देखकर जैसे दिल बाग बाग हो गया हो. उस वक्त खुशी का आलम और बढ़ गया जब भोपाल नवाब की दरियादिली यहां देखने को मिली. नवाब हमीदुल्लाह बेगम शाहजहां की तस्वीरों ने यह मुसलमानों की तालीम के लिए की गई कारगुजारी का पता लगा. सर सैयद अहमद को दोनों ही मुसलमानों की तालीम के लिए भरपूर मदद की. यह नहीं है कि यहां मुस्लिम तालीम लेते हैं. इस यूनिवर्सिटी का नाम अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जरूर है लेकिन यहां हर हर मजहब के लोग तालीम लेते हैं. एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी भी यही मौजूद है यह वह टेंपल से जहां पढ़ने के बाद दुनिया में उस शख्स की इज्जत सिर्फ अलीगढ़ यूनिवर्सिटी जुड़ने से 4 गुना बढ़ जाती है. मैंने 3 घंटे के दौरान पूरी यूनिवर्सिटी नहीं घूम पाया. तमाम फैकेल्टी डिपार्टमेंट देखने से महरूम रहा. लेकिन यह सबक जरूर लेकर आया की एक शख्स ने पायजेब पहन कर मुसलमानों को ऐसा तोहफा दिया है और तालीम का ऐसा जेबर दिया है जिसे ता उम्र नहीं भुलाया जा सकता. अल्लाह उनकी कब्र को नूर से भर दे और उनको जन्नतुल फिरदोस अता करें.

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