मध्यप्रदेश कैबिनेट में बड़ा फैसला: 7 कर्मचारी श्रेणियाँ खत्म, नई व्यवस्था और 1782 करोड़ का सिंचाई पैकेज मंजूर

 


(विशेष संवाददाता)

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने मंगलवार को अपनी राज्य कैबिनेट बैठक में कर्मचारी व्यवस्था और राज्य विकास के सम्बन्ध में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिनका असर राज्य भर में सरकारी कर्मचारियों और आदिवासी जिलों के विकास पर पड़ेगा। 

कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव

मध्यप्रदेश कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारी व्यवस्था में व्यापक सुधार करते हुए कुल 7 अलग-अलग श्रेणियों को समाप्त कर दिया है। अब प्रदेश में कर्मचारी केवल तीन मुख्य श्रेणियों में ही होंगे:

🔹 नियमित कर्मचारी

🔹 संविदा कर्मचारी

🔹 आउटसोर्स कर्मचारी

 इससे पहले दैनिक वेतन भोगी, कार्यभारित, स्थायीकर्मी, अंशकालीन जैसे अलग-अलग श्रेणियां थीं, जिन्हें अब सरकार ने मिला कर सरल कर दिया है। 

सरकार ने कहा है कि स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के बीच अब अलग वर्ग नहीं रहेगा क्योंकि सेवा शर्तें, वेतन व पेंशन समान हैं। वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को उनके सेवानिवृत्ति तक सेवाएँ प्राप्त होंगी, लेकिन उनके पदों का भविष्य उनकी सेवानिवृत्ति के बाद समाप्त हो जाएगा। आवश्यकता के अनुसार नए नियमित पद बनाए जाएंगे। 

अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान

कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि कार्यभारित कर्मचारियों की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। यह सुविधा पहले उपलब्ध नहीं थी। 

 न्यायालयीन जटिलताओं में कमी

नई व्यवस्था के बाद कर्मचारियों की श्रेणियों के विवाद के कारण न्यायालयों में होने वाले मामलों में आसानी होगी और प्रशासनिक जटिलताओं में भी कमी आएगी। 

 भविष्य में भर्ती नीति

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में नियुक्तियों का मुख्य जोर नियमित और संविदा कर्मचारियों पर रहेगा। आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी नहीं माना जाएगा क्योंकि वे निजी एजेंसियों के माध्यम से कार्य करते हैं। 

 आदिवासी जिलों के लिए 1782 करोड़ का सिंचाई पैकेज

राज्य कैबिनेट ने मध्यप्रदेश के तीन आदिवासी जिले अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी के लिए 1782 करोड़ रुपये का विशेष सिंचाई पैकेज भी मंजूर किया है। यह पैकेज नर्मदा घाटी विकास विभाग की परियोजनाओं के तहत अपरा नर्मदा, राघवपुर और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं के डूब प्रभावितों की समस्याओं के समाधान के लिए है। 

 इन परियोजनाओं से लगभग 71,967 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधाएँ उपलब्ध होंगी और 125 मेगावाट बिजली उत्पादन संभव हो सकेगा। इससे आदिवासी जिलों में कृषि, पानी और उर्जा की उपलब्धता में सुधार होगा। 

 यह महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गये

• भोपाल-इंदौर मेट्रो के संचालन व रखरखाव के लिए 90.67 करोड़ रुपए मंजूर। 

• छह जिलों में वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना पर 48 करोड़ रुपए स्वीकृत। 

• एमवाय अस्पताल इंदौर के नवनिर्माण पर 773 करोड़ रुपए की मंजूरी। 


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