(नूरजहाँ)
इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने शहर में दूषित पानी से हो रही मौतों और बीमारी के बढ़ते प्रकोप को लेकर मंगलवार को बेहद कड़ा रुख अपनाया। भागीरथपुरा सहित प्रभावित क्षेत्रों से जुड़ी चार से पांच जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रशासन को जमकर फटकार लगाई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना राज्य और नगर प्रशासन की जिम्मेदारी है, यह जनता का मौलिक अधिकार है।
“लोग मरते रहे, सिस्टम सोता रहा”
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि दूषित पानी की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं, लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि लोग बीमार होते रहे, मौतें होती रहीं और जिम्मेदार तंत्र निष्क्रिय बना रहा, जो बेहद चिंताजनक है। अदालत ने यह भी कहा कि इस घटना से देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल इंदौर की छवि को गहरा आघात पहुंचा है।
मौतें और सैकड़ों बीमार
याचिकाओं में बताया गया कि दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण डायरिया, उल्टी-दस्त और पेट संबंधी गंभीर बीमारियां तेजी से फैलीं। अलग-अलग रिपोर्टों में कई लोगों की मौत और सैकड़ों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है। अस्पतालों में मरीजों का दबाव बढ़ा हुआ है, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
सीवेज मिलने की आशंका
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि जल आपूर्ति लाइन में सीवेज लाइन के लीकेज के कारण पानी दूषित हुआ। इसके चलते पानीborne बीमारियों का प्रकोप फैला। कोर्ट ने इस तकनीकी खामी को गंभीर लापरवाही मानते हुए जिम्मेदारी तय करने के संकेत दिए।
प्रशासन से मांगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने राज्य शासन और नगर निगम से पानी की गुणवत्ता जांच, प्रभावित क्षेत्रों की सूची, बीमारों के इलाज की व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। साथ ही कहा गया कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटा जाएगा।
मुफ्त इलाज के निर्देश
कोर्ट के समक्ष प्रशासन ने बताया कि प्रभावित लोगों का मुफ्त इलाज कराया जा रहा है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इलाज पर्याप्त नहीं, बल्कि दूषित पानी की आपूर्ति तत्काल रोकना और स्थायी समाधान करना अनिवार्य है।
अगली सुनवाई पर नजर
हाईकोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए निगरानी जारी रखने के संकेत दिए हैं। अब अगली सुनवाई में प्रशासन को यह बताना होगा कि आखिर चूक कहां हुई, जिम्मेदार कौन हैं और जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
— स्वच्छ पानी केवल सुविधा नहीं, संवैधानिक अधिकार है, और इसकी अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी: हाईकोर्ट

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