“भोपाल में राशन घोटाले का विस्फोटक खुलासा! हजारों किलो अनाज गायब, खाद्य निरीक्षक पर रिश्वत के आरोप—विभाग की चुप्पी ने बढ़ाए शक”


खाद्य विभाग कटघरे में: जांच में गड़बड़ी साबित, RTI में कार्रवाई छुपी, जिम्मेदारों पर सवाल तेज

(फिरदोस अंसारी)

भोपाल जिले में शासकीय उचित मूल्य दुकानों की जांच में सामने आई अनियमितताओं ने खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। हजारों किलो अनाज की गड़बड़ी, NACO योजना में कथित फर्जीवाड़ा, और खाद्य निरीक्षक सनद शुक्ला पर लगे रिश्वत के आरोप, ये सभी तथ्य संकेत देते हैं कि मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित संगठित भ्रष्टाचार का हो सकता है।

 विभागीय जांच में सामने आई गड़बड़ियां


1- दुकान कोड 2803122, विक्रेता: प्रेमनारायण साहू, जांच: 26 जून 2025

- 1266 किलो गेहूं कम

- 461 किलो चावल अधिक

 स्टॉक में गंभीर अंतर, रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवालों


2- दुकान कोड 2803134, विक्रेता: रामबाबू साहू, जांच: 20 फरवरी 2024

- 1665 किलो गेहूं की गड़बड़ी

विभिन्न जिलों की ID का उपयोग कर NACO योजना की सामग्री में कथित हेराफेरी

 सरकारी योजना के दुरुपयोग की आ शंका


3-  दुकान कोड 2803135, विक्रेता: अब्दुल माजिद, जांच: 20 फरवरी 2024

- 102 हितग्राहियों को राशन वितरण नहीं

- 406 किलो गेहूं की गड़बड़ी

 पात्र हितग्राहियों के अधिकारों का उल्लंघन


 रिश्वत के आरोपों ने मामले को बनाया गंभीर

 7 फरवरी 2024 को दुकान कोड 2803231 संचालक द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई शिकायत में खाद्य निरीक्षक सनद शुक्ला पर आरोप लगाए गए कि दुकान पर कार्रवाई न करने के बदले ₹2 लाख की कथित रिश्वत ली गई। ₹4000 प्रति माह वसूली का आरोप लगाया गया। हालांकि विभाग ने  दुकान सस्पेंड कर विक्रेता के विरुद्ध थाने में प्रकरण दर्ज़ कराया।

 इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है, परंतु यदि सत्य पाए जाते हैं तो यह गंभीर भ्रष्टाचार का मामला बनता है।


 RTI में देरी और अधूरी जानकारी, जवाबों से ज्यादा सवाल

निर्धारित समय सीमा में जानकारी प्रदान नहीं की गई। प्रथम अपील के बाद आनन फानन में  त्वरित जवाब दिया गया।लेकिन मुख्य बिंदु,

- दोषियों पर की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए

- इससे यह सवाल उठता है कि क्या महत्वपूर्ण जानकारी रोकी गई?

 पूर्व में FIR, अब कार्रवाई का अभाव, विभागीय रुख पर प्रश्न

उपलब्ध तथ्यों के अनुसार, पूर्व में ऐसी अनियमितताओं पर दुकानों का निलंबन तथा पुलिस में FIR दर्ज करने की कार्यवाही की जाती रही है। लेकिन वर्तमान मामलों में गंभीर गड़बड़ियों के बावजूद कार्रवाई का स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया

- यह बदलाव विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

 निष्पक्ष जाँच की मांग

लोकायुक्त / आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को जाँच की जोम्मेदारी देते हुए संबंधित अधिकारियों एवं विक्रेताओं की भूमिका की विस्तृत जांच हो और दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई और FIR की जाये।प्रभावित हितग्राहियों को राशन की भरपाई हो।


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