*जबलपुर में जेबों से गुम हुए रिश्ते लौटाने निकली पुलिस: 106 मोबाइल बरामद, 18 लाख की चुप्पी फिर अपने मालिकों तक पहुँचीं!*

 


सायबर सेल ने CEIR पोर्टल से तलाशे गुम मोबाइल! किसी की यादें लौटीं, किसी की तस्वीरें, किसी की पूरी दुनिया वापस हाथों में आ गई।


(अनम इब्राहिम-7771851163)

जबलपुर/मध्यप्रदेश। इस शहर में हर रोज़ सिर्फ मोबाइल नहीं गुम होते साहब 

कभी किसी माँ की बेटे से आख़िरी चैट खो जाती है,

कभी किसी बूढ़े बाप की मरहूम बीवी की तस्वीर,

कभी किसी छात्र के सपनों से भरा डेटा,

तो कभी किसी मजदूर की पूरी कमाई का सहारा।


ज़नाब मोबाइल अब सिर्फ़ मशीन नहीं रहे!

ये आदमी की आधी ज़िन्दगी बन चुके हैं।

और जब ये खोते हैं, तो जेब से ज़्यादा दिल खाली होता है।


ऐसे दौर में जब सायबर ठग स्क्रीन के पीछे बैठकर लोगों की मेहनत, भरोसा और पहचान तक लूट रहे हैं, जबलपुर पुलिस की सायबर सेल ने 106 गुम मोबाइल तलाश कर उन हाथों तक पहुँचाए हैं, जिनकी उँगलियाँ कई दिनों से बेबसी में अपनी स्क्रीन तलाश रही थीं।


8 मई 2026 को पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के फरमान और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अपराध) जितेन्द्र सिंह की मौजूदगी में सायबर सेल द्वारा CEIR पोर्टल के माध्यम से तलाशे गए 106 गुम मोबाइल उनके असली धारकों को सुपुर्द किए गए। वैसे इन मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई गई है।


मगर इस पूरी कार्रवाई की असली क़ीमत रुपये नहीं थे

असल क़ीमत वो मुस्कानें थीं, जो मोबाइल वापस मिलते ही लोगों के चेहरों पर लौट आईं।


किसी लड़की को अपने दिवंगत पिता की तस्वीरें वापस मिलीं

किसी छात्र को उसकी पढ़ाई और नोट्स

किसी दुकानदार को उसके कारोबार का सहारा!

और किसी माँ को अपने बच्चे की आवाज़ से भरे वीडियो!!


लिहाज़ा सायबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल गुम होने पर तुरंत संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराएं और CEIR पोर्टल पर जानकारी अपलोड करें। साथ ही यदि कोई सायबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी या संदिग्ध डिजिटल गतिविधि सामने आए तो राष्ट्रीय सायबर हेल्पलाइन 1930, वेबसाइट पर अथवा सायबर सेल जबलपुर हेल्पलाइन 7701050010 पर तत्काल राफ्ता क़ायम करें।


मौज़ूदा वक़्त में जबलपुर पुलिस लगातार स्कूल-कॉलेजों और नागरिकों के बीच सायबर जागरूकता अभियान भी चला रही है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि टेलीग्राम, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर आने वाले निवेश, नौकरी, गेमिंग या कमीशन के लालच में अपनी बैंक जानकारी और निजी डेटा किसी के साथ साझा न करें।


क्योंकि अब डकैत जंगलों में नहीं मिलते...........


वो मोबाइल स्क्रीन के पीछे बैठते हैं।

उनके हाथों में बंदूक नहीं होती!

बस एक लिंक, एक OTP और आदमी की पूरी ज़िन्दगी लूट लेने की चालाकी होती है।


और ऐसे वक़्त में, जब भरोसा भी पासवर्ड बन चुका है तब 

जबलपुर पुलिस की ये कार्रवाई महज़ “मोबाइल वापसी” नहीं, बल्कि डिजिटल अँधेरे में उम्मीद की छोटी-सी रौशनी भी है।


बहरहाल इस मामले से हमें इबरत हासिल करना चाहिए अपने मोबाईल व क़ीमती सामानो की हिफाजत की जवाबदारी आप की है बस आपकी लापरवाही की, हर बार खोया हुआ मोबाईल मिल ही जाए ये ज़रूरी नही इसलिए हिफाजत करें अपनी व अपने क़ीमती समान की वरना आप की लापरवाही हमें फिर लिखने का मौका  देगी ......

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