जबलपुर में दरिया नीलाम, रेत माफिया मालामाल: तालाब की मेढ़ पर पकड़ा गया पीला डम्फर, मगर नदी का क़ातिल अब भी बेनक़ाब नहीं!*

 


*थाना गोसलपुर में बिना नम्बर का रेत से लदा डम्फर ज़ब्त और शहर फिर उसी सवाल के सामने खड़ा  आख़िर किसकी छतरी तले दरिया रोज़ लुट रहे हैं?*

 (अनम इब्राहिम-7771851163)

जबलपुर/मध्यप्रदेश। जबलपुर की नदियाँ इन दिनों पानी कम और मातम ज़्यादा बहा रही हैं।

धरती की छाती से रेत इस बेरहमी से नोची जा रही है, जैसे किसी मुर्दे की क़ब्र तक को चैन से सोने का हक़ न बचा हो।

बहरहाल 7 मई की रात  थाना गोसलपुर पुलिस को बुढागर तालाब की मेढ़ पर एक बिना नम्बर का डम्फर मिला। सामने सफेद, पीछे पीली बॉडी, जिस पर मदत लिखा था। मगर असल पहचान उसका रंग नहीं, उसका जुर्म था। डम्फर रेत से इस तरह भरा हुआ था जैसे किसी दरिया का कलेजा उधेड़कर उसमें ठूँस दिया गया हो।


पुलिस ने रोकना चाहा तो चालक अँधेरे में फ़रार हो गया।

भागा सिर्फ एक आदमी नहीं!

भागी वो जवाबदेही भी, जो हर बार इन रेत माफियाओं के पीछे खड़ी दिखाई देती है।


थाना प्रभारी गाजीवती पुसाम के मुताबिक़, डम्फर में भरी रेत चोरी और बेईमानी से हासिल कर अवैध परिवहन में लाई जा रही थी। पुलिस ने वाहन और रेत ज़ब्त कर आरोपी चालक के ख़िलाफ़ धारा 303(2), 317(5) बीएनएस, 4/21 खान एवं खनिज अधिनियम तथा 77/177 एमव्ही एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।


मगर जबलपुर अब सिर्फ़ कार्रवाई नहीं पूछ रहा

वो हिसाब माँग रहा है।


क्योंकि ये पहला डम्फर नहीं जो पकड़ा गया।

ये पहली नदी नहीं जो लूटी गई।

और शायद ये आख़िरी रात भी नहीं, जब धरती की कोख को चंद नोटों के लिए खोदा जाएगा।


रेत माफिया अब महज़ चोर नहीं रहे अनम 

वो इस शहर की नसों में पलती वो ख़ामोश बीमारी हैं, जो नदी सूखा देती है, तालाब खा जाती है और पीछे छोड़ जाती है  सिर्फ धूल, प्यास और सरकारी कागज़ों में दर्ज एक और मुक़दमा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ