भोजशाला पर अदालत के फैसले से सियासत गरमाई, दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल

 



(विशेष संवाददाता)

भोपाल/ग्वालियर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने धार स्थित भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के हालिया फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है, इसलिए इसे पूजा स्थल के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।


कोर्ट के फैसले को बताया अस्पष्ट

ग्वालियर में मीडिया से चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह ने कोर्ट के फैसले को “अस्पष्ट” बताते हुए कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में स्पष्ट कानूनी आधार जरूरी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाद का अंतिम समाधान सुप्रीम कोर्ट से ही होना चाहिए।


पूर्व मे दी गई थी पूजा और नमाज़ की अनुमति

धार जिले में स्थित भोजशाला लंबे समय से विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद का हिस्सा बताता है। इसी को लेकर वर्षों से पूजा और नमाज़ के अधिकार को लेकर विवाद चलता आ रहा है। भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद को लेकर 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक संतुलित व्यवस्था लागू की थी, जिसमें मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को जुमे की नमाज़ की अनुमति दी जाती थी, जबकि बाकी समय स्मारक ASI के नियंत्रण में रहता था और किसी एक पक्ष को स्थायी अधिकार नहीं था। अब हालिया मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह संतुलन बदलता दिख रहा है, जहां भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को व्यापक पूजा की अनुमति का रास्ता साफ हुआ है और पहले की साझा व्यवस्था प्रभावी रूप से समाप्त मानी जा रही है। फैसले के बाद जहां एक ओर हिंदू संगठनों ने इसका स्वागत किया है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

राजनितिक हलचल हुई तेज

फैसले के बाद प्रदेश में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है और विभिन्न दलों के नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं। दिग्विजय सिंह का यह बयान भी इसी कड़ी में अहम माना जा रहा है।

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