एआई जनरेटेड पोस्ट विवाद: प्रियंक कानूनगो के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन

 


(शहर संवाददाता)

भोपाल। प्रियंक कानूनगो द्वारा सोशल मीडिया पर की गई कथित विवादित पोस्ट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में इस मामले को लेकर जहांगीराबाद थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी तथा पुलिस कमिश्नर को भी कार्रवाई की मांग संबंधी आवेदन सौंपा गया था। अब इस प्रकरण में मुस्लिम त्योहार कमेटी भी सामने आ गई है। कमेटी ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच एवं संबंधित व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।

भोपाल की गंगा-जमुनी तहज़ीब, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को प्रभावित करने के आरोप लगाते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन भोपाल कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति महोदया को प्रेषित किया गया।


वैधानिक कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कथित एआई जनरेटेड भ्रामक और सांप्रदायिक पोस्ट साझा कर शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। कमेटी ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही संवैधानिक एवं गरिमामय पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा समाज में भ्रम, वैमनस्य और तनाव फैलाने वाली गतिविधियों पर कठोर कदम उठाने की मांग भी की गई।


भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने वालो पर कार्रवाई सुनिश्चित हो

कमेटी पदाधिकारी शमशुल हसन ने कहा कि एआई जनरेटेड झूठी और भड़काऊ सामग्री के माध्यम से भोपाल की अमन, भाईचारे और एकता की पहचान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।


विवादित मामलो और बयानों का उल्लेख

ज्ञापन में कहा गया कि मानव अधिकार आयोग जैसी संस्था पर आम जनता का गहरा विश्वास है और उसका उद्देश्य मानव अधिकारों की रक्षा करना है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि हाल ही में विवादित एआई जनरेटेड पोस्ट ऐसे समय साझा की गई, जब शहर में संवेदनशील माहौल बना हुआ था। ज्ञापन में विदिशा जिले के एक मंदिर में ताला लगाने के विवाद मे भी आयोग के सदस्य का नाम आना, भोपाल के ऐतिहासिक इक़बाल मैदान तथा रायसेन किले से जुड़े बयानों का भी उल्लेख किया गया।


संवैधानिक पद का दुरूपयोग

कमेटी ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को अनावश्यक रूप से तूल देना किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को शोभा नहीं देता तथा इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

उल्लेखनीय है कि प्रियंक कानूनगो पूर्व में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के सदस्य हैं। वे कई बार अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में भी रहे हैं, जिन पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।

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