(परवेज़ भारतीय)
भोपाल। नगर निगम भोपाल एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली और कथित अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है। हाल ही में लोकायुक्त टीम की छापामार कार्रवाई में करोड़ों रुपये के फर्जी बिलों का मामला सामने आने के बाद अब एक संविदा कर्मचारी, शिवकुमार सिंह तोमर, का नाम इस पूरे प्रकरण में प्रमुख रूप से उभरकर सामने आ रहा है।
प्राप्त शिकायती आवेदन के अनुसार, शिवकुमार सिंह तोमर, जो राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) में संविदा आधार पर प्रबंधक के रूप में नियुक्त हुए थे, मिशन की अवधि समाप्त होने के बाद भी नगर निगम की विभिन्न शाखाओं में सक्रिय बने रहे। आरोप है कि उन्होंने अपनी पहुंच और प्रभाव के चलते स्वच्छ भारत मिशन, परिवहन, सेंट्रल वर्कशॉप, वित्त, जलकार्य, कंप्यूटर एवं सामान्य प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में हस्तक्षेप बनाए रखा।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि तोमर पर फर्जी बिल तैयार कर भुगतान कराने में माहिर होने के आरोप हैं, और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने इन कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया। आरोपों के अनुसार, ऐसे अधिकारियों को एक “कुशल” व्यक्ति की आवश्यकता थी, जो उनके इशारों पर कार्य करते हुए फर्जी भुगतान प्रक्रियाओं को अंजाम दे सके।
जांच प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता का दावा है कि पूर्व में की गई शिकायतों के आधार पर एक जांच समिति गठित की गई थी, लेकिन समिति ने कथित रूप से निष्पक्ष जांच न करते हुए तोमर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता को न तो जांच में शामिल किया गया और न ही बार-बार मांगने के बावजूद जांच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराई गई।
आरोप यह भी है कि भोपाल कलेक्टर द्वारा तोमर की पदस्थापना संभाग से बाहर करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद, उन्हें पुनः नगर निगम में पदस्थ कर दिया गया, जिससे अधिकारियों की सांठगांठ पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोकायुक्त छापे के बाद बढ़ी जांच की मांग
हाल ही में लोकायुक्त की कार्रवाई में करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद इस मामले ने और तूल पकड़ लिया है। शिकायतकर्ताओं का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस पूरे नेटवर्क के “सूत्रधार” के रूप में शिवकुमार तोमर की भूमिका भी उजागर हो सकती है।
इसके अलावा, तोमर के विरुद्ध आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में प्रकरण क्रमांक 415/2022 भी दर्ज बताया जा रहा है, जिसकी जांच जारी है।
कार्रवाई की मांग
शिकायत में मांग की गई है कि ऐसे कर्मचारियों और उनसे जुड़े अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई गई है।

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