(न्यूज़ डेस्क)
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। ईंधन दरों में हालिया बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने चुनावों तक कीमतें नियंत्रित रखीं और बाद में जनता पर महंगाई का बोझ डाल दिया।
राहुल गांधी ने कहा अभी 3 रुपये का झटका,बाकी वसूली किस्तो में होगी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पेट्रोल-डीजल कीमतों में वृद्धि को “जनता से वसूली” बताते हुए कहा कि “3 रुपये का झटका अभी आया है, बाकी वसूली किस्तों में होगी।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे “मोदी सरकार द्वारा पैदा किया गया संकट” करार देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद जनता को राहत नहीं दी गई।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने वर्षों तक सस्ते क्रूड ऑयल का लाभ जनता तक नहीं पहुंचाया और अब कीमतें बढ़ाकर महंगाई को और बढ़ा दिया है। वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बढ़ती कीमतों के लिए पेट्रोल-डीजल पर लगाए जा रहे भारी टैक्स को जिम्मेदार बताया।
आपम आदमी पार्टी ने बताया "जनता के साथ धोका"
आम आदमी पार्टी की ओर से सांसद संजय सिंह ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही जनता पर बोझ डालना शुरू कर दिया गया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे “जनता के साथ धोखा” बताते हुए कहा कि चुनाव तक कीमतें रोकी गईं और बाद में अचानक बढ़ा दी गईं। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि डीजल महंगा होने से किसानों पर सीधा असर पड़ेगा। वहीं AAP नेता अमन अरोड़ा और कुलदीप सिंह धालीवाल ने इसे केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीति की विफलता बताया।
“अगर आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है।”-अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि “अगर आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है।
लोगों के साथ “धोखा” - सागरिका घोष
तृणमूल कांग्रेस की नेता सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान सरकार ने ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतों पर चुप्पी साधे रखी तथा बाद में जनता पर बोझ डाल दिया। उन्होंने इसे आम लोगों के साथ “धोखा” बताया।
केंद्र सरकार ने दी सफाई
वहीं केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह फैसला आवश्यक हुआ। भाजपा नेता अनिल सरीन ने कहा कि केंद्र सरकार ने लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास किया। सरकार समर्थकों का तर्क है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर घरेलू कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है।
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वहीं आम जनता में भी महंगाई और बढ़ते खर्च को लेकर चिंता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

0 टिप्पणियाँ